Tuesday, October 27, 2020
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इनकम टैक्स क्या है? (Income Tax Kya Hai)

आयकर (Income Tax) क्या है?

इनकम टैक्स (Income tax) को हिंदी में आयकर (Aayakar) कहते हैं। जो कि हमारी सरकार (Government) द्वारा इनकम (Income) पर लगाया जाता है। आयकर (Aayakar) वह कर है। जो भारतीय लोगों (Indian people) पर भारतीय सरकार (Indian Government) के द्वारा आय (Income) पर लगाया जाता है। आयकर (Aayakar) सरकारों के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction of Governments) के भीतर स्थित सभी संस्थाओं (Institutions) द्वारा उत्पन्न वित्तीय आय (Financial income) पर लागू होता है। कानून के अनुसार (According to the Law) प्रत्येक व्यवसाय और व्यक्ति (Business and Person), कर देने का एक कर वापसी के लिए पात्र (Eligible for return) है और उसे हर साल का आयकर रिटर्न फाइल (Income Tax Return File) करना होता है। जिसे हम आय कर रिटर्न आर.टी.आर (R.T.R.) भी कहते हैं।

आयकर कानून (Income Tax Law) को सूचित करने वाले आयकर अधिनियम (Income Tax Act) 1961 में दिया गया है। यह तभी से ही हर भारतीय (Indian) के आय (Income) पर लगता है। भारत (India) में यह प्राय एक खास सीमा (Limit) से अधिक आय (Income) वालों के द्वारा अदा किया जाता है। जैसे अगर आपकी इनकम (Income) 5 लाख सालाना है। तो आपको यह आयकर (Income tax) देना होगा और बुजुर्गों (Elderly) के लिए यह सीमा (Limit) तीन लाख सालाना पर रखी गई है। हाल ही में इसमें कुछ परिवर्तन (Changes) आए हैं। जो हम आगे बताएंगे।

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टैक्स के प्रकार (Tax ke Prakar)

भारत (India) में टैक्स (Tax) मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं-

1-  प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) – वह कर जो प्रत्यक्ष (Direct) रूप से लिया जाता है|

2-  अप्रत्यक्ष कर ( Indirect Tax)– वह कर जो सरकार अप्रत्यक्ष (Indirect) रूप से हमसे लेती हैं|

प्रत्यक्ष कर (Direct Tax)

प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) वह कर जिसमें कर का प्रारंभिक भुगतान (Initial Payment) करने वाला व्यक्ति ही कर का अंतिम भार वहन (Ultimate Load Bearing) करता है। अर्थात प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) में कर (Tax) के भार (Burden) को दूसरे पर डालने की संभावना (Chance) नहीं होती है|

भारत (India) में प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) से संबंधित सभी मामले 1 जनवरी 1964 से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (Central Board of Direct Taxes) ( CBDT ) को सौंप दिए गए हैं। इसे राजस्व बोर्ड अधिनियम (Revenue Board Act) 1963 से अधिकार प्राप्त है। CBDT वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) में राजस्व विभाग (Revenue Department) का एक हिस्सा है। जितने भी प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) लिए जाते हैं। वह इसी नियम (Rool) के तहत लिए जाते हैं। इन करो (Taxs) में मुख्यतः आय कर (Income Tax), निगम कर (Corporation tax), कैपिटल गेनस टैक्स (Capital gains tax), सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (Security Transaction Tax), कॉरपोरेट कर और गिफ्ट टैक्स (Corporate tax and gift tax) आदि डायरेक्ट टैक्स (Direct Tax) के प्रकार हैं|

अप्रत्यक्ष टैक्स (Indirect Tax) 

वह टैक्स (Tax) जिसे सीधे जनता (Public) से नहीं लिया जाता किंतु उसका बोझ जनता (Burden Public) पर ही पड़ता है। वह भी अप्रत्यक्ष (Indirect) रूप से जैसे देश (Country) में तैयार किए गयी वस्तुओं (Items) पर लगने वाला उत्पादन शुल्क (Production Fee) और आयात या निर्यात (Import or Export) की जाने वाली वस्तुओं पर लगने वाला सीमा शुल्क (Borler Fee) लेकिन जब आप इन सामान को या इन वस्तुओं (To stuff or these) को खरीदते हो। तो यह जो कंपनियां (Companies) होती हैं। यह शुल्क (Fee) आप पर ही लगाती है। जो आपको ही जमा
(Pay) करना पड़ता है। जब भी आप कोई सामान खरीदते (Buy Goods) हैं तब। जिसे हम आम भाषा में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (Goods and Services Tax) या (जीएसटी) GST भी कहते हैं|

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इनके अलावा भी बहुत से कर लगाए जाते हैं। (Other Tax)

1. पंजीकरण शुल्क (Registration Fee), स्टांप शुल्क (Stamp Fee), स्थानांतरण कर (Transfer Tax)- इस स्टांप कर टैक्स (Stamp Tax) का अधिनियम (Act) 1899 के तहत लगाया जाता था। लेकिन हाल ही में इसे 18-09-2018 में इस टैक्स (Tax) में कुछ बदलाव किए गए थे। जिसमें इस टैक्स (Tax) की फीस (Fee) थोड़ी बढ़ाई गई थी। यह वही टैक्स (Tax) है। जब हम कोई पंजीकरण स्टांप (Registration Stamp) बनवाते हैं। तो हम से लिया जाता है। जो सीधे सरकार के खाते (Government Accounts) में जाता है।

2. शिक्षा उप कर (Education Sub Tax)- यह वह कर है। जो भारत सरकार (Indian Government) द्वारा शुरू किए गए थे हैं और बनाए गए शैक्षिक कार्यक्रमों (Educational Programs) को पूरा करने के लिए उन पर लगने वाले शुल्क (Fee) प्रदान करते हैं। जो सरकार (Government) को दिए जाते हैं।

3. एंट्री टैक्स (Entry Tax)- एंट्री टैक्स (Entry Tax) वह कर होते हैं। जो भारत (India) में राज्य सरकारों (State Governments) द्वारा लगाए गए होते हैं। एक राज्य (State) से दूसरे राज्य (Other States) में माल की आवाजाही (Movement of Goods) पर जो लगाए जाते हैं। जो सीधे ही राज्य सरकार(State Government) लेती है।

4. रोड टैक्स या टोल टैक्स (Road Tax or Toll Tax)- रोड टैक्स या टोल टैक्स (Road Tax or Toll Tax) आपकी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन (Vehicle Registration) के साथ वसूल (Collected) किया जाता है, जो आपको राज्य (State) की सभी सड़कों (All Roads) पर गाड़ी चलाने की अनुमति (Permission to drive) देता है। अगर आपके पास टोल टैक्स (Toll Tax) नहीं है। तो आप उस राज्य (State) की सड़कों पर गाड़ियां नहीं चला सकते (Can not drive on the roads)। टोल टैक्स (Toll Tax) किसी सड़क की मरम्मत और निर्माण (Road Repair and Construction) के लिए पैसा जुटाने (Raising money) के लिए व्यक्तियों से सड़क पर चलते समय वसूला (Collected) जाता है।

5. प्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax)- संपत्ति कर (Property Tax) आपकी संपदा कर (Estate Tax) के रूप में आप से लिया जाता है। यह प्रत्यक्ष कर राशि (Direct Tax Amount) होती है। जो किसी अचल संपत्ति के स्वामी (Real Estate Owner) द्वारा उस संपत्ति के मूल्य (Property Value) के अनुसार अदा (Payout) की जाती है। इस कर (Tax) का अनुमान संपत्ति मूल्य (Property Value) के आधार पर लगाया जाता है। इसमें यह महत्वपूर्ण (Importent) नहीं है। कि उस संपत्ति के स्वामी (Property Owner) को कोई लाभ (Benefit) हुआ है या फिर नहीं यह संपत्ति कर (Property Tax) हर हालत में देना ही पड़ता है।

6. व्यवसायिक कर (Business Tax) इस कर (Tax) को आम भाषा (Common Language) में पेशा कर (Profession Tax) भी कहते हैं। व्यवसायिक कर (Business Tax) भारत (India) में राज्य सरकारों (State Governments) द्वारा लगाया और वसूला (Collected) जाने वाला कर है। यह एक अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) है। पेशे से आय अर्जित करने वाला (Income Earner)। व्यक्ति या पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (Chartered Accountant by Person or Profession), कंपनी सेक्रेटरी (Company secretary), वकील (Lawyer), डॉक्टर (Doctor) इत्यादि। जैसे व्यवसाय (Business) करने वाले किसी व्यक्ति को इस व्यावसायिक कर (Business Tax) का भुगतान (Payment) करना पड़ता है। वह भी अपनी राज्य सरकार (State Government) को।

7.मनोरंजन कर (Entertainment Tax)- इस कर को हम मनोरंजन कर (Entertainment Tax) के रूप में ही जानते हैं। किसी भी तरह के व्यवहार (Behavior), व्यवसायिक (Business), मनोरंजन (Entertainment) पर लगाया जाने वाला कर। जैसे कि मूवी टिकट (Movie Ticket), प्रदर्शनी (Exhibition) या खेल (Game), कार्यक्रम (Event) और बहुत कुछ मनोरंजन (Entertainment) वाली चीजों पर कर जो दे होता है। वह मनोरंजन कर (Entertainment Tax) के अंतर्गत आता है।

इन सभी कर (All Tax) का लगाने का उद्देश्य जनता (Public) को वस्तु और सेवा उपलब्ध (Goods and Services Available) कराने के लिए पर्याप्त धनराशि (Sufficient funds) इकट्ठा करना होता है। जैसे सड़क (Road), सार्वजनिक शौचालय (Public Toilets), सार्वजनिक यातायात (Public Traffic), प्रमुख गेम आयोजन (Major Game Events), सरकारी व्यक्तियों की सैलरी (Salaries of Government Persons), मिड डे मील (Mid Day Meals), सरकारी अस्पताल का खर्चा (Expenses of Government Hospitals), वह सब इन्हीं टैक्सों (Taxs) से दी जाती है। इसलिए आप सभी को टैक्स (Tax) देना चाहिए अगर आप टैक्स (Tax) नहीं देते हैं। तो देश की अर्थव्यवस्था (Economy) नीचे गिर जाती है। जिससे देश (Country) में चलने वाला रुपया की वैल्यू (Rupee Value) दूसरे देशों (Other Countries) में कम होने लगती है। यही कारण है कि आज $1 हमारे इंडिया (India) में ₹75 का हो गया है।

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आयकर रिटर्न क्या है (Income Tax Return Kya Hai)?

आयकर रिटर्न (Income Tax Return) जिसे हम इंग्लिश में आइ.टी.आर (R.T.R.) भी कहते हैं। वह एक फॉर्म (From) होता है। जिसमें निर्धारित आयकर विभाग (Income Tax Department) को अपनी आय (Income) और उसके बारे में जानकारी फाइल (File) करनी होती है। यह विभिन्न प्रकार (Various Types) से की जाती है। जैसे I.T.R-1, I.T.R-2, I.T.R-3, I.T.R-4, I.T.R-5, I.T.R-6 और I.T.R-7, जब आप एक बैलेंसड रिटर्न (Balanced Return) दाखिल करते हैं। तो आपको निश्चित नुकसान (Certain Loss) उठाने की अनुमति (Permission) नहीं होती है। यह अधिनियम (Act) इनकम टैक्स (Income Tax) 1961 और 1962 के रूल के अधिनियम (Act) के अनुसार फार्म (From) किया जाता है।

Income Tax Return Kya Hai

अगर आम भाषा में कहें तो आय कर रिटर्न (Income Tax Return) वास्तव में आपकी आमदनी और खर्च का लिखित हिसाब (Written Account of Income and Expenses) है। जिसे आप केंद्र सरकार (Central Government) को विस्तार से यह जानकारी देते हैं। कि उस वित्त वर्ष (Financial Year) में आपने अपनी नौकरी (Business or Profession), कारोबार या पेशे (Business or Profession) से कितनी रकम (Amount) कमाई (Earnings) और कहां पर निवेश (Investment) की इसके साथ ही इसमें आप सरकार (Government) द्वारा निर्धारित टैक्स बचत (Tax Savings) के विकल्प में निवेश (Investment) करने, जरूरी चीजों पर खर्च करने या बिल (Bill) जमा करने पर टैक्स छूट (Tax Exempt) के बारे में और एडवांस टैक्स (Advance Tax) चुकाने की जानकारी भी देते हैं। जिससे आपको थोड़ा फायदा (Profit) भी होता है।

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आयकर स्लैब (Income Tax Slab) 2020-21

नए टैक्स स्लैब (Tax Slab) 2020-21 के अनुसार 2।5 लाख रुपए तक की आय (Income) पहले की तरह ही कर मुक्त (Tax Free) रहेगी और 2।5 लाख से ₹5 लाख तक की आय (Income) वाले करदाताओं (Taxpayers) को पांच फीसद टैक्स (Tax) देना होगा। 5 से 7।5 लाख रुपए की सालाना इनकम (Annual Income) पर 10 फीसद आयकर (Income Tax) का भुगतान करना होगा।

7।5 लाख रुपए से 10 लाख रुपए की कमाई (Earnings) पर 15 फीसद टैक्स (Tax) देना होगा। ₹10 लाख से 12।5 लाख तक की सालाना आय (Annual Income) पर नई टैक्स व्यवस्था (Tax system) के तहत 20 फीसद का भुगतान (Payment) करना आप सभी के लिए अनिवार्य है। व आपको यह देना ही होगा 12।5 से ₹15 लाख की सालाना आय (Annual Income) पर अब आपको 25 फीसद टैक्स (Tax) का भुगतान (Payment) करना पड़ेगा और हम आपको बता दें, कि 15 लाख रुपए से अधिक की आय (Income) पर 30 फीसद टैक्स का भुगतान (Tax Payment) आपको करना पड़ेगा।

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