Sunday, July 3, 2022
Homeधर्म संसारमां दुर्गा से जुड़े रहस्य | Secrets Associated with Maa Durga

मां दुर्गा से जुड़े रहस्य | Secrets Associated with Maa Durga

हिन्दू धर्म (Hindu religion) में मां दुर्गा (Maa Durga) का अपना एक खास महत्व है। नवरात्रि (Navratri) आते ही हर जगह मां के मंदिर (Mother’s Temple) सज जाते हैं और भक्त (Devoteei) कतारों में खड़े होकर माता के दर्शन (Mother’s Darshan) की प्रतीक्षा (Wait) करते हैं। मां दुर्गा (Maa Durga) को पहाड़ावाली, शेरावाली, जगदम्बा, मां अम्बे, आदि नामों से भी जाना जाता है। माता के मंदिर (Mother’s Temple) पूरे भारत (India) में बने हुए हैं। अगर आप मंदिरों की संख्या (Number of Temples) गिनने लगेंगे तो थक जायेंगे।

सरस्वती, लक्ष्मी, और पार्वती माता (Parvati Mata) का ही रूप हैं और त्रिदेव की पत्नियां (Tridev’s wifes) भी हैं। माता (Mata) के बारे में हमारे पुराणों और शास्त्रों (Puranas and Shastras) में बहुत सी कथायें (Stories) हैं। देवी पूरण में देवी के रहस्यों (Mysteries of Goddess) का खुलासा होता है।

आज हम आपको माता (Mata) के बारे में कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जो उनके हर भक्त (Devoteei) को जाननी चाहिए। हालांकि हम आपको पूरी बात तो नहीं लेकिन जरूरत की लगभग सभी बातें बता सकते हैं।

आखिर कौन है माता रानी (Who is Maa Durga)

अम्बिका (Ambika):- अकेले रहकर हर तरफ घूमने वाले सदाशिव ने अपने शरीर (Body) से शक्ति की रचना (Design of power) की, जो उनसे कभी भी अलग होने वाली नहीं थी। भगवान शिव की उस शक्ति को विकार रहित अविनाशी (Indestructible power disorder), बुद्धि तत्व (Intelligence element) बताया गया। उसी शक्ति को अम्बिका के नाम से जाना जाता है। इनकी 8 भुजाएं हैं और ये अनेक शस्त्र धारण करती हैं। यह कालरूप सदाशिव की पत्नी हैं इन्हें जगदम्बा (Jagdamba) के नाम से भी जाना जाता है।

इसे भी पढ़ें:- इक्यावन शक्ति पीठों में से एक चामुंडा देवी की कथा

देवी दुर्गा (Goddess Durga):- हिरण्याक्ष के बारे में तो आप जानते ही हैं। यह अत्यंत क्रूर राक्षस (Extremely cruel monster) था। इसके प्रकोप से धरती वासी ही नहीं स्वर्ग के देवता भी परेशान हो चुके थे। इसलिए उन्होंने मां अम्बिका (Ambika) की आराधना की। उन्होंने हिरण्याक्ष को उसकी सेना सहित नष्ट कर दिया, तब से उन्हें दुर्गा (Maa Durga) के नाम से भी जाना जाने लगा।

माता सती (Mother Sati):- राजा दक्ष की पुत्री सती से भगवन शंकर की शादी हुई थी। एक बार एक यज्ञ में भगवन शंकर को ना बुलाये जाने पर सती क्रोधित हो गयीं और यज्ञ कुंड (Sacrificial Pool) में कूदकर अपने प्राणों की आहुति दे दीं। इसके बाद उनके शरीर के अंग जहां-जहां गिरे, वहां शक्तिपीठों का निर्माण (Construction of Shaktipeeth) हो गया। बाद में सती ने हिमालयराज के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया और घोर तपस्या (Austerity) करके शिव को पति के रूप में पा लिया।

पार्वती (Parvati):- सती के दूसरे रूप को पार्वती के नाम से जाना जाता है। माता पार्वती (Mother Parvati) को भी दुर्गा (Maa Durga) का स्वरूप माना जाता है, लेकिन वह दुर्गा (Maa Durga) नहीं हैं। इनके दो पुत्र गणेश और कार्तिकेय हैं।

कैटभा (Catabha):- हिरण्याक्ष की तरफ से युद्ध करने वाले मधु (Madhu) और कैटभ (Kaitabh) नाम के दो भाइयों का वध करने के बाद माता (Mata) को इस नाम से भी पुकारा जाने लगा।

काली (Kali):- भगवान शंकर की तीन पत्नियां थी। उमा उनकी तीसरी पत्नी थीं। उत्तराखंड (Uttarakhand) में देवी उमा का एकमात्र मंदिर है। भगवान शंकर की चौथी पत्नी के रूप में मां काली (Maa Kali) की पूजा की जाती है। इन्होने इस धरती को भयानक राक्षसों के आतंक (Demons Terror) से मुक्त किया। काली (Kali) भी देवी अम्बा की पुत्री थीं। इन्होने ही रक्तबीज नाम के भयानक दानव का वध (Slaughter of Demon) किया था।

महिषासुर मर्दिनी (Mahishasura Mardini):- ऋषि कात्यायन की पुत्री ने ही राम्भासुर के पुत्र महिषासुर का वध किया था, इसके बाद ही उन्हें महिषासुर मर्दिनी (Mahishasura Mardini) के नाम से जाना जाने लगा। एक अन्य कहानी के अनुसार महिषासुर के आतंक से त्रस्त सभी देवताओं ने मिलकर अपने शरीर से एक ज्योति निकाली जो एक सुन्दर कन्या के रूप में प्रकट हुई। सभी ने अपने अस्त्र-शस्त्र दिए इसके बाद ही महिषासुर का वध (Slaughter of Mahishasura) माता ने किया।

इसे भी पढ़ें:- जानिए मां गौरी क्यों करती हैं सिंह की सवारी | Story of Devi Maha Gauri

तुलजा भवानी और चामुंडा माता (Tulja Bhavani and Chamunda Mata):- चंड और मुंड दो भाइयों का वध करने के बाद माता अम्बिका को ही चामुंडा के नाम से जाना जाने लगा। महिषासुर मर्दिनी (Mahishasura Mardini) को ही कई जगहों पर तुलजा भवानी के नाम से जाना जाता है। तुलजा भवानी और चामुंडा की पूजा (Worship of Chamunda) खासतौर पर महाराष्ट्र में ज्यादा की जाती है।

दश महाविद्यायें (Das Mahavidyayas):- इनमें से कुछ देवी अम्बा के रूप हैं तो कुछ देवी सती या मां पार्वती या राजा दक्ष की अन्य पुत्रियां हैं। इनके नाम निम्नलिखित हैं-

  1. काली,
  2. तारा,
  3. त्रिपुरसुंदरी,
  4. भुवनेश्वरी,
  5. छिन्नमस्ता,
  6. त्रिपुरभैरवी,
  7. धूमावती,
  8. बगलामुखी,
  9. मातंगी,
  10. कमला।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments