Saturday, December 10, 2022
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बेवफाई की वह सच्ची जानलेवा कहानी (infidelity is a true killer story)

बेवफाई की वह सच्ची जानलेवा कहानी (infidelity is a true killer story)

 

भारी जायदाद, धन-दौलत सब कुछ है जगदीश के पास। बाप (father ) करोड़ों (Millions) छोड़ कर गया है । जिसका ब्याज ही इतना आ जाता है  कि उसे कुछ करने की आवश्यकता ही नहीं ।

वह शराब (drink ) और औरतों (women’s ) का भोग तो अवश्य करता है . लेकिन केवल आवश्यकता की सीमा तक। यह नहीं कि अनाप-शनाप दौलत (wealth) है तो उस के दम पर अय्याशी के साधन (means of debauchery) ढूंढता फिरे, जैसा कि आमतौर पर होता है।

उसे लगाव केवल तंत्र-मंत्र (Black magic) और पराशक्तियों (super powers) के रहस्य खोजने में है । उसकी अपनी एक विशाल लाइब्रेरी (library) है। जिसमें इसी से संबंधित किताबें (books) भरे पड़े है । शैतान (beelzebub) से सम्पदा और गुप्त ताकत पाने के उपाय बताने वाली, प्राचीन तंत्र विद्या से जुड़ीं (associated with ancient tantra), इन्द्रजाल आदि पुस्तकें वह ढूंढता रहता है । कौआ तंत्र, उल्लू तंत्र, आदमी अथवा जानवर (Beast) कोई भी हो, उनका परकाया प्रवेश, गुप्त अथवा रहस्यमय ताकत वाले किसी भी स्त्री-पुरुष (women- Men) का पता लगने पर वह किसी भी कीमत पर उससे यह विद्या सीखने का प्रयास करता । वह रहस्यमय शक्ति (mysterious power) देश-दुनिया के किस कोने में है इसकी भी उसे परवाह (care) न थी।

दिल्ली (Delhi) की झुग्गियां हों अथवा कामरूप  के घने जंगल…जादुई शक्तियों (magical powers) की खोज में वह सभी स्थानों पर तांत्रिकों की चौखट पर (at the door of the tantriks) सजदे कर चुका है ।

उसके पास (with him) इसी विषय से जुड़ी हजारों पुस्तकें (thousands of books) भी है , जिनमें जादू-टोना (bewitchment), भूत-प्रेत (ghost) जैसे विषय होते है । उसके दिमाग में सोते-जागते (while sleeping), खाते-पीते (eating and drinking) इसी से संबंधित ख्याल उमड़ते रहते है ।

जगदीश (Jagdish) अपनी दौलत (wealth) के बल पर चैन से जीवन (life) गुजार सकता है किन्तु दिमागी फितरत उसे ऐसा करने देती, तभी तो। वह सनकी आदमी (freak man) के रूप में चर्चित हो उठा। क्योंकि उसकी हर सांस में (in breath) एक ही दीवानापन (madness) बसा है -“आसमानी चमत्कार…तंत्र विद्या।” (celestial miracles)

यहां तक कि उसने हृदय रोग (heart disease) भी पाल लिया है । डाक्टरों ने उसे (the doctors gave him) स्पष्ट चेता दिया था कि उसे किसी भी प्रकार के आघात (the strokes) से दूर रहना है। किसी भी प्रकार की टेंशन(tention ), ज्यादा भागदौड़ अथवा कैसा भी आघात (the strokes) वह झेलने की दशा में नहीं ।  ऐसी कोई भी स्थिति उसके लिए खतरनाक (Dangerous), क्या जानलेवा (lethal) भी हो सकती है ।

अतः उसे किसी भी तनाव, गुस्से (tension, anger) अथवा डर (anger or fear) से बचना होगा।

डाक्टरों (doctors) की चेतावनी ने जगदीश (jagdish) को अपने तक ही सीमित कर दिया। वह एकांतप्रिय (reclusive) बन गया। इस समय वह अपनी रहस्यमयी लाइब्रेरी (mysterious library) में किताबों से भरी अलमारियों के बीच एक सोफे पर बैठा (sitting on the couch) कुछ सोच रहा था कि दरवाजे (doors) पर किसी की दस्तक से वह झुंझला उठा।

उसने ऊपर कि मंजिल (the floor above) का यह फ्लैट (flat) खरीदा है  तो इसलिए कि स्वयं उसे तो नीचे जाने की बेकार में जरूरत क्या थी और इतनी सीढ़ियां चढ़कर (climbing the stairs) कोई गैर भी आने से पहले सौ बार सोचे। वह किसी के साथ मित्रता नहीं रखता । फालतू में समय बर्बाद (waste time in vain) करने वालों से वह चिढ़ता है।  अगर ऐसा कोई शख्स उसके पास आ जाता है  तो वह घंटों तक (for hours) तनाव (stress) में रहता था, जबकि तनाव (stress ) उसके लिए जानलेवा हो सकता था।

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वह बड़बड़ाया (he muttered)- “साले जानवर, आ जाते हैं टेंशन पैदा करने!” फिर एक लम्बी सांस (long breath) लेकर न चाहते हुए भी वह  उठा क्या उठना पड़ा। फिर आगे बढ़कर उसने दरवाजा (door) खोल दिया। लेकिन दरवाजे पर मौजूद शख्स को देखकर उसे धक्का सा लगा। उसका दिल (heart) बेचैन हो उठा।

एक बहुत आकर्षक लड़की (cute girl) उसके सामने खड़ी मुसकरा(smile) रही है । उसने गुलाबी स्कर्ट और वाइट टॉप (pink skirt and white top) पहना हुआ है । वह कंधे पर बड़ा सा बैग(Bag) लटकाये हुए थी।

उसने मुसकराकर अभिवादन(smiling greetings) किया-“गुड मार्निंग जगदीश सर…(Good morning Jagdish sir…)।” अपनी सांसों पर काबू पाती हुई वह बोली-“सीढ़ियां चढ़ते हुए खत्म ही नहीं हो रही थीं। ऐसा लगा चांद(moon) पर पहुंच जाऊंगी…”

वह हैरान होकर(bewildere) उसिका चेहरा (face) देखे जा रहा था।

“क्या बात है? मुझे देखकर ऐसी क्या परेशानी(Trouble) हो गयी, जो टेंशन में दिख रहे हो?” उत्साह भरे स्वर (upbeat voice) में वह बोली।

लेकिन जगदीश (jagdish) उस लड़की के स्वागत का कतई इच्छुक नहीं था। इसलिए उसने लड़की को (to the girl) अंदर(Inside) आने के लिए नही बोला

दोनों (both) एक-दूसरे (each other) को देख रहे । करीब एक मिनट बाद जैसे उसे कुछ याद आया और वह एकदम बोला-“तुम…तुम रीटा?”(You…you Rita?”)

ठंडी सांस (cold breath) भरती हुई रीटा (rita ) बोली-“चलो पहचान तो लिया! लेकिन अब भी अंदर आने की इजाजत (permission) है या नहीं? यह स्थान(place) ऐसा आकर्षक (Attractive) भी नहीं है कि खड़ी रहकर रात (night) बिता दूं।”

हड़बड़ाता-सा (flustered) जगदीश (jagdish) एक ओर हो गया। रीटा अंदर (within) चली आई।

इसके बाद (After that) बिना किसी औपचारिकता (formality ) के रीटा (rita ) एक चेयर पर जा बैठी (sitting) और कमरे के मूल्यवान सोफे आदि पर आंखें दौड़ाने (rushing eyes) लगी।

खूबसूरत (beautiful) भारी पर्दों से निगाह हटाती रीटा ने कहा-“क्या ठाठ हैं भई! अच्छा बताओ, कैसे हो?(how are you?)

लेकिन सच्चाई (truth) यह थी कि उसके आने से वह ठीक (normal) नहीं था। बाहर का दरवाजा बन्द(door closed) करके वह आकर रीटा को घूरने(stare) लगा।

जगदीश का हृदय वश से बाहर हो रहा था (Jagdish’s heart was getting out of control) तथा उसके हाथ-पैर बेदम होने लगे थे। तीन साल पहले जिस रीटा को वह बीती हुई कहानी के रूप में भूल चुका था, वह आज अपने पूरे आकर्षण और भटकाने (attraction and distraction) वाली छवि के साथ (with image) उसके सामने बैठी हुई थी

दूरस्थ क्षेत्रों (areas) में तंत्र-मंत्र (Black magic) के माहिरों की खोज में जिन दिनों जगदीश (jagdish) देश भर में घूम रहा था, तो उसे पता चला कि कामरूप (Kamrup) में सत्रहवीं सदी में एक ऐसा कबीला बसता था जिसके सदस्य बरस में एक बार किसी भी जानवर (Beast) के रूप में अपने को बदल लेते थे। इसके लिए केवल कुछ अनुष्ठान किये जाते थे।

उस तांत्रिक (Tantric) कबीले के शेष बचे लोगों को ढूंढते समय जगदीश की मुलाकात (appointment) वहां के एक ईसाई दुकानदार (shopkeeper) की बेटी रीटा (daughter rita) से हुई। बीस साल(twenty years) की स्मार्ट रीटा को देखकर (seeing smart rita) उसका ऐसा प्रभाव पड़ा कि उसके जवानी से भरपूर अंगों पर जगदीश जैसा खुश् मिजाज इन्सान (human) भी पिघल (melt) उठा।

जाने क्या जादू (Magic) किया जगदीश ने कि रीटा भी उसके प्यार (Love) में डूब गयी। उसके यौवन की तपिश में जगदीश जल उठा।

इश्क-विश्क (Ishq Vishk) के तरानों के साथ नवयौवना रीटा के मचलते यौवन का मकरन्द इस भवरे ने खूब चखा।

लेकिन तभी उसे ध्यान आया (noticed) कि वह अपने जिस अभियान पर निकला था, उसे तो वह जवानी (youth) के खेल में भूल ही बैठा है। बस फिर क्या था, अवसर पा वह वहां से उड़न छू हो गया।

तीन साल (three years) बीतते-बीतते अब तो रीटा (rita ) की परछाई (shadow) भी उसके मन में कहीं बाकी न बची थी। लेकिन अब जब वह सब से दूर हो कर यहां तनहाई (loneliness) काट रहा था तो जाने कहां से उसे ढूंढती हुई वह (she is looking for) यहां आ धमकी थी।

सप्ताह (Week) में एक बार जगदीश पास में ही स्थित एक डिपार्टमेंटल स्टोर (a Departament store) को फोन (phone ) कर देता था और उसकी आवश्यकता (need) की सभी चीजें, जिनमें खाने-पीने की और अन्य वस्तुएं शामिल होती थीं, वहां से डिलीवरी बॉय (delivery boy) दे जाता था। इसके अलावा उसे कहीं आना-जाना (Coming- going) नहीं था।

मन के भाव छिपाता जगदीश बोला-“कुछ पीना पसन्द करोगी?” (Would you like to drink something?) “तले काजू और सोडा के साथ व्हिस्की (Whiskey with Fried Cashews and Soda) तुरंत ही रीटा बोल पड़ी।

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दो गिलास (two glasses) बनाकर जगदीश ने एक में कम व्हिस्की (whiskey) डाली और एक में ज्यादा। फिर ज्यादा व्हिस्की का गिलास उसे थमाता हुआ बोला-“मैं तुम्हारे लिए काजू (cashew) लाता हूं…”

कहकर वह किचेन (kitchen) की तरफ बढ़ा तो दिलफरेब मुसकराहट के साथ रीटा ने कहा-“थैंक यू।” (thank you )

एक प्लेट में काजू (cashew ) लेकर वह जल्दी ही वापस आ गया। प्लेट (plate) मेज पर रखकर उसने गिलास (Glass) से एक घूंट भरा तो उसे बदन में ताजगी सी आती महसूस (Feel) हुई।

मुंह में काजू डालता हुआ वह शांत स्वर में बोला-“रीटा! तुम्हारे लिए मैं क्या कर सकता हूं?”(Rita! What can I do for you?)

“आपको कुछ नहीं करना है, बल्कि इतनी दूर से आपके लिए कुछ करने तो मैं आयी हूं।”

“हमारे गांव (village) में तुम काया परिवर्तन कर लेने वाले कमाल (amazing) के लोगो को (to the logo) खोजन आये थे.तुम्हें ध्यान है।”

जगदीश ने रीटा के याद (memory) दिलाने पर स्वीकृति में सिर (Head) हिलाया। उसने सोचा (Think), उस परकाया प्रवेश की विधा से (by mode of entry) रीटा का क्या लेना-देना है? फिर भी उसने कहा -“तुम ठीक कहती हो।”

“उस संबंध (relation) में मैंने जानकारी (Information) प्राप्त कर ली है। मैं समझती हूं कि आज भी तुम्हें काया परिवर्तन (body change) की विद्या में रुचि (interest) अवश्य होगी।” अपनी बात पर जोर देती रीटा ने गम्भीरता (seriousness) से कहा।

सुनकर जगदीश (jagdish) आश्चर्यचकित (Surprised) हो उठा।

हैरानी भरे स्वर (surprised voice) में जगदीश ने कहा–“और इतनी दूर से (from so far) मुझे ढूंढती हुई तुम यहां तक आ गयीं? केवल मेरा ज्ञान बढ़ाकर मेरी जिज्ञासा शांत करने की मंशा लेकर?”

“नहीं तो क्या तुम यह सोच रहे हो कि मैं तुमसे अपने साथ की गई बेवफाई का प्रतिशोध (retaliation for infidelity) लेने आयी हूं?”

“अरे नहीं…नहीं। मैं ऐसा नहीं सोच रहा। तुम्हारा आभारी (Thankful) हूं। खैर! पूरी बात बताओ।” वह हड़बड़ाया।

“जब तुम वहां से चले आये तो उसके बाद तीन माह बीते होंगे कि…।” अपनी बात बीच में रोक रीटा ने इधर-उधर निगाह दौड़ाई। ऐसा लगा कि शायद उसे किसी चीज(thing) की आवश्यकता है।

“अच्छा, एक सिगरेट (cigarette) पिलाओ, मुझे बहुत तलब हो रही है।” रीटा (rita ) ने बेचैनी भरे अंदाज में कहा तो जगदीश ने भी आस-पास नजर (vision) डाल कर खड़े होते हुए कहा।

“अभी लाता हूं। सिगरेट शायद लाइब्रेरी (library) में है।”

हम चार दोस्त और वो रविवार की रात

ड्राइंग रूम और लाइब्रेरी (Drawing Room and Library) के बीच काफी फासला था। हैरत में डूबा जगदीश (jagdish) कुछ सोच-समझ नहीं पा रहा था।

विनय भरी मुद्रा में रीटा ने कहा- “प्लीज! तुम्हें परेशानी तो होगी। लेकिन मैं सिगरेट की जरूरत महसूस कर रही हूं।”

“अरे कुछ नहीं, मैं अभी आया…” कहता हुआ जगदीश तेज कदमों से लाइब्रेरी की तरफ लपका। उसके सीने में हल्का सा दर्द भी महसूस होने लगा।

लेकिन वह इतना उतावला था कि उसने इस हल्के दर्द पर कोई ध्यान नहीं दिया। उसे तो अब यह जल्दी थी कि परकाया प्रवेश का रहस्य रीटा उसे जल्द-से-जल्द बता दे। उतावलापन में उसका उत्साह पूरे जोरों पर था।

कुछ दिन पहले से वह सिगरेट पीना बहुत कम कर चुका था। इसलिए वह सिगरेट का पैकेट (pack of cigarettes) ध्यान रखने की परवाह कम ही करता था। इसलिए वह सिगरेट का पैकेट जाने कहां रख भूला था। वह बुरी तरह अपने को कोस रहा था।

उसने सिगरेट की तलाश में लाइब्रेरी (Library looking for cigarettes) के कागजातों व किताबों के जमघट में सिगरेट ढूंढने का प्रयास किया।

अन्ततः मेज की दराज (desk drawer) में सिगरेट का पैकेट उसे रखा मिल गया, जिसे उठाकर वह करीब-करीब दौड़ता हुआ ड्राईग रूम (drying room) में आ पहुंचा।

लेकिन ड्राइंग रूम (drying room )में तो कुछ और ही उसके इंतजार में था। देखते ही उसके हाथ से छूटकर सिगरेट का पैकेट (pack of cigarettes) नीचे जा पड़ा था। कमरे से रीटा जाने कहां चली गयी थी?

रीटा को जिस कुर्सी पर (on the chair) वह बैठा छोड़ गया था, वहां रीटा की गुलाबी स्कर्ट (pink skirt) पड़ी थी और उसके ऊपर बैठा एक बड़ा मेंढक अपनी गोल आंखों से जगदीश की ओर देख रहा था।

कुर्सी के पास कालीन पर रीटा की ब्रेसरी और टॉप (Brasserie and Top) पड़े दिख रहे थे। एकदम उसे ख्याल आया, तो क्या रीटा मेंढक बन गयी है। यह विचार काँधते ही जगदीश को लगने लगा कि सारा ड्राइंग रूम तेजी से घूम रहा है। भय और आश्चर्य से (by surprise) एक जोरदार चीख उसके मुंह से निकली।

वह इस चमत्कार (Miracle) को झेल नहीं पाया और पलभर में उसके प्राण (life) पखेरू उड गये। वह धड़ाम से फर्श पर जा गिरा।वह मर चुका था।

तभी बाथरूम का दरवाजा (bathroom door) खोलकर रीटा ड्राइंग रूम (drawing room) में आयी और एक-एक कदम बढ़ाकर जगदीश के निकट आयी। एक जहरीली मुसकराहट उसके होठों पर खेल रही थी।

जगदीश के पास बैठकर (sitting next to Jagdish) वह झुकी। पहले उसने उसके सीने पर (on the chest) हाथ रखा। फिर कान लगाकर उसके दिल की धड़कन(pulsation) देखनी चाही।

आज जगदीश की धड़कनें (Jagdish’s heartbeat) उसके साथ बेवफाई (infidelity) कर गयी थीं। डाक्टर ने कह ही रखा था कि कोई झटका वह सह नहीं पायेगा और हुआ भी वही। उसकी धड़कनें (his beats) तेज होती जा रही थीं, फिर उत्तेजना का ज्चार-जिसे वह झेल नहीं सका और उसका हार्ट फेल (heart failure) हो गया था।

मुसकराती हुई रीटा (smiling rita) उठकर खड़ी हो गयी और चेयर से अपने कपड़े उठा कर (picking up clothes) वह उन्हें पहनने लगी।
उसे युवती से औरत बनाकर मुंह फेरने वाले को उसने बड़ी सीधी सी मौत दे दी थी।

रीटा ने कपड़े (dresses) पहनाए आराम से अपना बैग उठाया (bag picked up) और वह बड़ा हरा मेंढक उठाकर उस में रख लिया टहलती हुई से बाहर (outside) निकल गयी।

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