Friday, July 1, 2022
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रहस्यमयी दुल्हन की कहानी भाग-1 | Rahasyamayi Dulhan Part-1

रहस्यमयी दुल्हन की कहानी भाग-1 | Rahasyamayi Dulhan Part-1 Hindi Drama Story रहस्यमयी दुल्हन-1 ये कहानी है एक दुल्हन की जिसका नाम अमृता है।

गाजे बाजे के साथ नई दुल्हन (New Bride) का स्वागत किया जा रहा था। निर्मला देवी हाथ में आरती का थाल लिए उसके दरवाजे तक पहुंचने का इंतजार कर रही थीं। घर के अंदर मंगल गीत गाये जा रहे थे। कुछ औरते निर्मला देवी के साथ खड़ी हुई आपस में नई बहू (New Daughter-in-Law) के विषय में चर्चा कर रही थीं।

कुछ देर बाद अमृता (Rahasyamayi Dulhan Part-1) अपने ससुराल (Laws House) के दरवाजे पर आंखे झुकाए सकुचाई सी गठबंधन (Alliance) से बंधी हुई अपने पति (Husband) रजत के साथ खड़ी हुई थीं। सुर्ख लाल लहंगे के साथ सोलह श्रृंगार (Sixteen Makeup) किये अमृता के सौंदर्य पर मोहित (Fascinated by Beauty) हो रजत उसकी ओर ही देखे जा रहा था।

यह देखकर निर्मला देवी की प्रसन्नता का कोई पार ना था। सर्वप्रथम उन्होंने नवविवाहित दम्पति की आरती उतारी और फिर उसके बाद गृह प्रवेश की विधि (Home Entry Method) पूरी करने के लिए चावलों भरा चांदी का कलश (Silver Vase) अमृता के आगे रख दिया।

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चावल के कलश (Rice Urn) को अपने दाहिने पैर से अंदर की ओर गिराने के बाद अमृता रजत के साथ घर के अंदर एक कदम रखती है। तभी एक औरत चांदी की परात (Silver Plate) में घुला हुआ लाल रंग लाकर अमृता के आगे रख देती हैं। उस परात (Water Holder) के आगे एक सफेद रंग की चौड़ी कपड़े की पट्टी बिछा दी जाती हैं। रजत अमृता की गठबंधन की ओढ़नी (Coalition Hoarding) लेकर अलग खड़ा हो जाता हैं और अमृता अपना पैर परात (Water Holder) मे रखते हुए आगे बढ़ती है। परात (Water Holder) से पैर निकाल कर अमृता उस सफेद रंग के कपड़े पर अपने लाल रंग के पैरों के निशान बनाती हुई आगे बढ़ती है। उसके आगे बढ़ते ही गिरा हुआ कलश (Kalash) अपने आप सीधा हो जाता है। बिखरे हुए चावल कलश (Kalash) के अंदर भर जाते है और सफेद कपड़े से पैरो के निशान (Foot Print) अपने आप ही मिट जाते हैं।

निर्मला देवी की कुल-परंपरा के अनुसार गृह प्रवेश (Home Entry) के बाद नववधू (Newlyweds) को आठ दिन तक अपने कमरे (Room) में अकेले ही रहना होगा। इस बीच वह नये परिवेश (New Environment) में अजनबी लोगों (Stranger People) के बीच सामंजस्य (Harmony) बिठाने की कोशिश करेगी। ये आठ दिन पुरूष के संयम और धैर्य (Moderation and Patience) की भी कड़ी परीक्षा होती थी। इन आठ दिनों में वह रात में अपनी पत्नी के कमरे (Room) में प्रवेश नही कर सकता था।

सारी रस्में (Rituals) खत्म होने के बाद अमृता को उसके कमरे (Room) में ले जाया गया। कमरे (Room) में दियों की रोशनी की गई थी। सुगंधित इत्र की खुशबू (Fragrant Perfume Fragrance) से कमरा (Room) महक रहा था। पलंग पर लाल चादर (Red Sheet) बिछी हुई थी जिसके ऊपर सफेद रंग का एक कंबल (Blanket) अधखुला बिछाया गया था।

कमरे (Room) का दरवाजा बंद कर अमृता ने अपना घूंघट (Veil) खोलकर चैन की सांस ली। उसे यह कुलपरंपरा कुछ अजीब सी लगी लेकिन इसमें छुपी अच्छी शिक्षा (Good Education) को देखते हुए वह अपने आप को समझा देती है। विवाह की थकान (Marriage Fatigue) की वजह से अमृता को पलंग (Bed) पर लिटते ही नींद आ जाती है।

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अचानक से आधी रात को अमृता की नींद खुली। उसे चूड़ियों की खन-खन सुनाई दे रही थी। उसने उठ कर देखा तो वहां बिल्कुल उसके जैसे कपड़े पहने हुए एक और दुल्हन (Bride) बैठी थी जिसके चेहरे पर घूंघट पड़ा हुआ था। अमृता उसे अचानक से अपने कमरे (Room) में देखकर डर गई थी। अमृता जैसे ही उठकर उसके पास जाती है वैसे ही वह धीरे धीरे चलते हुए बाहर निकल जाती है। अमृता उसे कई आवाजे भी लगाती हैं लेकिन वह नही रुकती। आखिर में अमृता  उसका पीछा करने लगती है।

उस दुल्हन (Bride) का पीछा करते हुए जब अमृता अपने कमरे (Room) से बाहर भागती हैं तो वो देखती हैं कि वह एक महलनुमा हवेली (Palatial mansion) की सबसे ऊपरी मंजिल पर खड़ी है। इस हवेली में कितनी मंजिल थी, किसी के लिए भी कह पाना संभव नहीं था। इस मंजिल पर खड़े होकर अमृता को नीचे की सभी चीजें चींटी जैसी नजर आ रही थीं। इस हवेली (Mansion) की हर मंजिल हूबहू एक जैसी थी।

पूरी हवेली लाल रंग के पत्थरों से बनी हुई थी। इस वर्गाकार हवेली की हर मंजिल पर चालीस कमरे (Room) थे। हर एक तरफ दस कमरे (Room) बने हुए थे। हर दस कमरों के बाद एक घुमावदार सीढ़ी थी। चारों दीवारों और उनसे लगें हुए पत्थर के स्तंभों पर एक जैसी नक्काशी और चित्रकारी (Carving & Painting) उकेरी गई थी। बीच मे एक बड़ा सा आंगन था।

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अमृता यह सब देखकर कुछ देर के लिए हैरान हुई थी Rahasyamayi Dulhan Part-1 लेकिन उसे यह सब कुछ जाना पहचाना लगा।

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