पार्टनर पर शक करना मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं|How to save the relationship.

After wedding कपल्स की जिदंगी में कई बड़े बदलाव आते हैं। ज़िम्मेदरियां भी काफी बढ़ जाती हैं। ज़िन्दगी के इस नए पड़ाव में एक दूसरे का साथ देने के साथ साथ भरोसा करना भी काफी महत्वपू्ण है जाता है जिसकी जिसकी वजह से कोई भी रिश्ता सही से चल सकता है। अगर रिश्ते में भरोसा ना हो तो रिश्ते में दरार पड़ने लगती है। वहीं आपस में संदेह आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। यही वजह से शादी के बाद कई रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है और बात समय पर ना संभले तो बात तलाक़ तक भी पहुंच जाती है जो की किसी भी जोड़े के लिए सही बात नहीं होती। कई केस में हत्या की भी वारदात सामने आती है। ज्यादातर स्त्रियों के चरित्र पर उंगली उठाना

आम बात हो चली है ऐसे में स्त्री मजबूर हो जाती है। ऐसे मामले बात बिगड़ने के बाद कोर्ट पर जाना आम बात है ऐसे ही एक मामले में हाई कोर्ट ने कहा था कि किसी भी शादी को अच्छे से चलाने के लिए समझदारी और भरोसे कि जरुरत पड़ती है। अगर रिश्ते में किसी भी वजह से कड़वाहट का एहसास होता है और पर्याप्त समझदारी नहीं आ पा रही है तो कपल्स को आपस में समय रहते बात चीत करनी चाहिए ताकि समय रहते गलत फेह्मिया दूर हो जाए। साथ ही एक दूसरे पर विश्वास / भरोसा करना भी काफी जरूरी है अगर एक दूसरे पर और अपने रिश्ते पर भरोसा है तो रिश्ता कभी टूट नहीं सकता है। केवल बेबुनियाद बातों को लेकर अपने पार्टनर पर शक करना केवल रिश्ते को खराब कर सकता है। और कोर्ट कचहरी के चक्रो में पढ़ कर दोनो को ही काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसको कोर्ट में ले जाने से बेहतर आपस में सुलझाने की कोशिश करें। कोर्ट ने कई फैसलों को सुनते हुए कहा कि अगर अपने जीवनसाथी पर बेबुनियाद शक करना मानसिक प्रताड़ना की श्रेणी में आता है और इस आधार पर तलाक़ की याचिका को मंजूरी दी जाती है।

कोर्ट में एक मामला आया था जिसमे एक कपल(Couple) की शादी(Wedding) को 28 साल हो चुके थे। इतनी लंबी शादी के बाद पति को अचानक से आभास हुआ की पत्नी अपने शादी शुदा रिश्ते को लेकर वफादार नहीं है लेकिन पत्नी ने प्रताड़ना के बाद कोर्ट में तलाक़ की याचिका दी थी। कोर्ट ने माना कि किसी के चरित्र पर शक करना और परेशान करना भी मानसिक प्रताड़ना का आधार है। क्यूंकि जिसपर शक किया जाता है वो काफी मानसिक यातना से गुजरता है। इस केस में दंपति को विवाह 1989 को हुआ था और साथ ही इस जोड़े के दो बच्चे भी थे। पत्नी ने फैमिली कोर्ट में तलाक़ की याचिका दायर की थी। पत्नी ने कहा था कि शादी के बाद से ही पति की ओर से उसे दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का समन करना पड़ा था। साथ ही कुछ वर्षों बाद पति ने उसके चरित्र पर भी उंगलियां उठाना शुरू कर दिया था। शक के साथ साथ वो उससे मार पीट भी करने लगा था। लेकिन महिला बच्चों के खातिर इतने समय तक सब कुछ झेलती रही लेकिन वर्ष 2006 में जब पति ने बच्चों के सामने ही उससे मारपीट करना शुरू कर दिया तो उसकी सहनशक्ति ने जवाब दे दिया तो उसने पुलिस से इसकी शिकायत कि। मामला फैमिली कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने पत्नी को तलाक़ को मंजूरी दे दी।
पहले के समय में महिलाओं पर काफी अत्याचार होते थे महिलाएं काफी प्रताड़ित होती रही है। बिना कुछ कहे बिना किसी शिकायत के केवल परिवार की गरिमा बनाए रखने के लिए चुपचाप सब सहन करती रहती थीं। वहां ज़माना बीत गया पति पत्नी पर बिना किसी प्रमाण के उसके चरित्र पर उंगलियां उठा दिया करता था। अब कोर्ट और कानून में भी ऐसे इल्जाम को साबित करने के लिए ठोस प्रमाण की आवश्कता होती है। जो पति द्वारा नहीं दिया जा सकता तो ऐसे आरोप बेबुनियाद ही होते है।

आपने पार्टनर से खुल कर बात करें।

लोग कहते हैं के इंसान को ज़िन्दगी में हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए इसीलिए ज़िन्दगी में किसी मुश्किल से नहीं घबराना चाहिए। अगर आपके मन में अपने जीवन साथी को लेकर कोई भी बात आती है तो अपने पार्टनर से खुल के बात करें अपनी बात समझा कर और शक को दूर करें और एक दूसरे पर भरोसा बनाए रखें। किसी भी रिश्ते में भरोसा रिश्ते को बनाए रखने की पहली शर्त है। लेकिन अगर आपका शक सही निकलता है तो फिर आप कोई कठोर फैसला लेने से ना घबराएं। खुद की सेल्फ रेस्पेक्ट को सबसे ऊपर रखें। याद रखें की कोई भी रिश्ता दोनों लोगों के चाहने से ही ठीक होता है। ऐसे में अगर आपका पार्टनर आपसे दूर होना चाहता है तो आप एक हद तक ही रोक सकते हैं एक हद तक ही रिश्ते को संभालने कि कोशिश कर सकते है लेकिन आप जबरन अपने पार्टनर को साथ रखने की कोशिश ना करें क्योंकि ऐसे में आप दोनों खुश नहीं रह सकेंगे। अगर ऐसा हो तो Mutual understanding से कोई सॉल्यूशन निकलें।

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