मधुमेह को कंट्रोल करने के आसान उपाय | Diabetes Control Measures

अपने पिछले ब्लॉग में हमने यह समझने की कोशिश की थी डायबिटीज क्या है और यह कैसे होता है इसके अलावा हमने यह भी जाना कि डायबिटीज के लक्षण क्या है| यह किन किन कारणों से हो सकता है| डायबिटीज के कितने प्रकार हैं और यह अन्य किन मूल बीमारियों का कारण बन सकता है? अपने पिछले ब्लॉग में हमने आपसे यह भी कहा था कि हम हमारे अगले ब्लॉग में अपने  ब्लड ग्लूकोस लेवल को किस तरह से कंट्रोल कर सकते हैं और ऐसे कौन से तरीके अपना सकते हैं जिससे हम डायबिटीज खास करके टाइप टू डायबिटीज पर नियंत्रण कर सकें, इस बारे में बात करेंगे| आज हम मधुमेह नियंत्रण के उपाय के बारे में तो बात करेंगे ही साथ ही साथ में हम अपने अगले ब्लॉग में यह भी जानेंगे की ऐसी कौन सी चीजें हैं जिनका सेवन करने से आप डायबिटीज पर नियंत्रण पा सकते हैं|

मधुमेह नियंत्रण के उपाय | आसान और उपयोगी

 वैसे तो डायबिटीज का जड़ से इलाज नहीं किया जा सकता और यह भी कहना ठीक नहीं है कि बिना दवाइयों के डायबिटीज कंट्रोल किया जा सकता है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हम पूरी तरह से दवाइयों पर निर्भर हो जाएं |यह बात तो लगभग सभी जानते होंगे की दवाइयों का बहुत ज्यादा सेवन करने से हमें उनके साइड इफेक्ट्स का भी सामना करना पड़ता है इसलिए हम अपनी तरफ से अपने आप को जितना फिट रख सकते हैं, जितना कम से कम दवाइयों पर निर्भर हो सकते हैं उतना करना चाहिए| 

टाइप वन डायबिटीज में इंसुलिन  लेना अनिवार्य क्यों है?| Type 1 diabetes me insulin lena jruri kyun ho jata hai?

डायबिटीज कितने प्रकार के होते हैं इस विषय में हम पहले भी चर्चा कर चुके हैं |आमतौर पर डायबिटीज के दो प्रमुख प्रकार हैं टाइप वन डायबिटीज और टाइप टू डायबिटीज|

मधुमेह नियंत्रण के उपाय | आसान और उपयोगी

टाइप वन डायबिटीज टाइप टू डायबिटीज से कई मायनों में अलग होता है| टाइप वन डायबिटीज  एक स्वप्रतिरक्षित रोग यानी ऑटोइम्यून डिजीज है इसमें हमारे शरीर में ऑटो एंटीबॉडीज बनते हैं जोकि इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं  पर हमला कर उन्हें नष्ट करने लगते हैं| और इसी कारण से हमारे शरीर में इंसुलिन नहीं बन पाता| इंसुलिन हमारे शरीर में बनने वाला एक  बेहद महत्वपूर्ण हार्मोन है जोकि अग्न्याशय यानी पैंक्रियास मैं बनता है| यह हार्मोन हमारे रक्त (blood) में मौजूद ग्लूकोस को  कोशिकाओं (cells)  में पहुंचाने का काम करता है| इसी ग्लूकोस के द्वारा  कोशिकाएं हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान कर पाती हैं जिससे हम रोजमर्रा के काम आसानी से कर लेते हैं| टाइप वन डायबिटीज में इंसुलिन बन ही नहीं पाता जिसके कारण हमें बाहर से इंसुलिन लेना ही पड़ता है इसी वजह से टाइप वन डायबिटीज को इन्सुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज भी कहते हैं| टाइप वन डायबिटीज आमतौर पर अनुवांशिक होता है और यह ज्यादातर छोटे बच्चों या युवकों में होता है हालांकि अन्य किसी भी उम्र के लोग भी इसका शिकार बन सकते हैं|

टाइप टू डायबिटीज,प्रीडायबिटीज और जेस्टेशनल डायबिटीज | type 2 diabetes, prediabetes and gestational diabetes

 विश्व में डायबिटीज के सभी मरीजों में 95% मरीजों को टाइप टू डायबिटीज होता है| टाइप टू डायबिटीज अनुवांशिक तो हो सकता है इसके अलावा इसके और भी कई कारण होते हैं जैसे मोटापा, खानपान और रहन-सहन का अस्वस्थ तरीका, हाई ब्लड प्रेशर इत्यादि|  इन कारणों को देखकर हम इतना तो अनुमान लगा ही सकते हैं कि अगर हम इन कारणों पर नियंत्रण पा लेंगे तो मधुमेह पर  भी नियंत्रण पा सकते हैं|

शुगर तुरंत कम करने के उपाय

 प्रीडायबिटीज जोकि डायबिटीज के निदान के पहले की स्थिति होती है जिसमें ब्लड ग्लूकोस का स्तर बढ़ जाता है लेकिन यह अभी डायबिटीज के स्तर तक नहीं पहुंचता, इस स्थिति में हम  मधुमेह नियंत्रण के उपाय करके खुद को डायबिटीज का शिकार होने से बचा सकते हैं|

 कुछ इसी प्रकार प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं में भी ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है और अगर सही समय पर इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो यह डायबिटीज में तब्दील हो जाता है|  इन्हीं कारणों के चलते हमारा मधुमेह  नियंत्रण के उपायों के बारे में जानना अति आवश्यक हो जाता है|

 मधुमेह नियंत्रण के उपाय | Diabetes control measures

आज हम मधुमेह नियंत्रण के जिन उपायों की बात करने जा रहे हैं वह बहुत ही सरल और उपयोगी हैं| जिन्हें कोई भी कर सकता है| टाइप टू डायबिटीज में या तो इंसुलिन कम बनता है या फिर किसी कारणवश इंसुलिन कोशिकाओं के अंदर ब्लड ग्लूकोस नहीं पहुंचा पाता| तो यदि हम किसी प्रकार इन चीजों पर नियंत्रण कर लें तो डायबिटीज पर भी नियंत्रण कर सकेंगे| किसी भी बीमारी के नियंत्रण के उपाय उस बीमारी के कारणों में छुपे होते हैं|  मधुमेह के लिए यह सरल उपाय भी कुछ ऐसे ही हैं:

वजन पर नियंत्रण

टाइप टू डायबिटीज का एक कारण है मोटापा जब हमारे  शरीर में फैट टिशूज ज्यादा हो जाते हैं तो इंसुलिन ब्लड ग्लूकोस को कोशिकाओं के अंदर पहुंचाने में असमर्थ हो जाता है| हमारी कोशिकाओं की बाहरी तरफ इंसुलिन रिसेप्टर मौजूद होते हैं  जिनकी मदद से इंसुलिन कोशिकाओं के अंदर ग्लूकोस पहुंचाता है fat  की परत जम जाने के कारण यह रिसेप्टर्स इंसुलिन के साथ मिलकर काम नहीं कर पाते| सिर्फ डायबिटीज ही नहीं मोटापा और भी कई गंभीर बीमारियों जैसे हृदय से जुड़ी बीमारियों का भी कारण होता है| इसलिए यदि हम  अपने वजन  पर नियंत्रण कर रहे हैं तो हम एक साथ कई बीमारियों पर नियंत्रण कर रहे हैं|

मधुमेह नियंत्रण के उपाय | आसान और उपयोगी

आजकल बाजार में वजन कम करने की अनेकों दवाइयां मिल रही हैं लेकिन इन सभी दवाइयों के अपने साइड इफेक्ट हो सकते हैं|  इसलिए  यदि आप प्राकृतिक तरीके से अपने वजन पर नियंत्रण करते हैं तो यह हमारे इंटरनल ऑर्गन और भौतिक उपस्थिति (physical appearance)  दोनों के लिए ही फायदेमंद है| नियमित रूप से व्यायाम व योगा करें,  पानी का खूब सेवन करें,  ताजा  व मौसमी फल  और सब्जियों का  सेवन करें, फास्ट फूड से जितनी हो सके उतनी दूरी बनाए रखें|सोने और उठने का एक समय निर्धारित करें और उसका पालन करें|  यह कुछ तरीके हैं जिनसे आप अपना वजन घटा सकते हैं  फलता मधुमेह पर भी नियंत्रण कर सकते हैं|

खानपान और रहन-सहन के तरीकों में सुधार

 आज जो हमारा खानपान और रहन-सहन का तरीका है वह सिर्फ डायबिटीज ही नहीं बल्कि और भी कई बीमारियां जैसे एंजायटी (anxiety) और डिप्रेशन का भी कारण है| आज के समय में लोग इतने व्यस्त हैं की वह अपने लिए भी समय नहीं निकाल पा रहे हैं| और इसी कारणवश ज्यादा से ज्यादा प्रोसैस्ड फूड (processed food) पर निर्भर होते जा रहे हैं| जिसके कारण लीवर और पाचन प्रणाली से संबंधित कई बीमारियों में बढ़ोतरी हो रही है|  साथ ही साथ डायबिटीज के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है|

इतना ही नहीं यदि लोग healthy खाने की कोशिश भी कर रहे हैं तो बाजार में उन्हें इतना मिलावटी सामान मिल रहा है कि उनका मकसद पूरा नहीं हो पा रहा है| अब इससे बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं? हालांकि कुछ चीजें ऐसी हैं जिनमें हमारा बस नहीं है जैसे दूध हमें बाहर से खरीद कर ही पीना पड़ेगा हम अपने 2BHK फ्लैट पर गाय या भैंस पालकर रोज उससे ताजा दूध निकालकर पियें यह तो संभव नहीं है लेकिन कुछ चीजों का बंदोबस्त हम अपने घर से ही कर सकते हैं| जैसे कि हम अपने घर पर टेरेस गार्डन या किचन गार्डन लगा सकते हैं जिसमें हम सब्जियां उगा सकते हैं| और थोड़ी सी मेहनत करके घर पर खाना बनाकर बाहर के प्रोसैस्ड फूड को घर के ताजा खाने से बदल सकते हैं|

शारीरिक रूप से सक्रिय बने

मधुमेह नियंत्रण के उपाय | आसान और उपयोगी

 पहले के समय में जब बहुत ज्यादा उपकरण नहीं हुआ करते थे तब लोग ज्यादा से ज्यादा काम अपने हाथों से ही करते थे| जिसके कारण लोग स्वस्थ और तंदुरुस्त रहते थे| लेकिन आज के समय में ज्यादा से ज्यादा काम मशीनों द्वारा ही होता है| इसके अलावा आज ज्यादातर युवकों को जो नौकरियां मिलती हैं उसमें भी उन्हें लैपटॉप या कंप्यूटर पर बैठकर ही काम करना होता है| जिसके कारण लोग शारीरिक रूप से निष्क्रिय बनने लगते हैं|  और धीरे-धीरे यह शारीरिक निष्क्रियता हमारे आंतरिक अंगों को भी कमजोर करने लग जाती है| यदि आपके पास कोई शारीरिक श्रम वाला काम नहीं है तो भी अपने आप को शारीरिक रूप से सक्रिय रखने का प्रयास करें| उपकरणों का कम से कम इस्तेमाल करें| इससे आपके पैसों की भी बचत होगी और आप शारीरिक रूप से स्वस्थ भी रहेंगे|

शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन ना करें

 केवल डायबिटीज ही नहीं शराब व अन्य नशीले पदार्थ हमारे शरीर के और भी कई अंगों को गंभीर रूप से क्षति पहुंचा सकते हैं|  नशीले पदार्थ हमारे दिमाग पर असर करते हैं जिसके कारण हमारे  शरीर के अंग ठीक तरह से काम नहीं कर पाते| शराब में कैलरी की संख्या ज्यादा होती है जिसके कारण मोटापा होता है और यह तो हम जान ही चुके हैं कि मोटापा डायबिटीज का एक बड़ा कारण है| इतना ही नहीं एल्कोहल  यानी शराब सीधे-सीधे पैंक्रियास को नुकसान पहुंचाता है|  और यह तो हम जान ही चुके हैं कि पैंक्रियास से ही इंसुलिन बनता है जो कि हमारे ब्लड ग्लूकोस को नियंत्रित रखता है| 

नियमित रूप से जांच कराएं

ऊपर बताए हुए सारे उपाय आप बड़ी ही आसानी से अपने घर  पर ही बैठे बैठे कर सकते हैं| मधुमेह के इन उपायों के साथ-साथ नियमित रूप से अपने ब्लड ग्लूकोस स्तर की जांच कराना भी आवश्यक है|  अपने डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी दवाई या उपचार का सेवन ना करें|