Tuesday, October 27, 2020
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नाभि खिसकने के लक्षण और ठीक करने के उपाय (Nabhi Khisakna ke lakshan aur thik karne ke upay)

नाभि खिसकना क्या है (Nabhi Khisakna Kya Hai)?

नाभि खिसकने (Nabhi Khisakna) की समस्या के बारे में आपने सुना ही होगा। कई लोग इसको नाभि का डिगना (Nabhi ka Digna), धरण (Dhran) और धरण गिरना (Dharan Girna) के नाम से भी जानते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार (According to Ayurveda), जैसे रीढ़ की हड्डी में टेढ़ापन (Spinal Curvature) आ सकता है, उस ही तरह नाभि और पेट की मांसपेशियों में भी मरोड़ (Torsion in navel and Abdominal Muscles) या अन्य दिक्कत आ सकती है। ऐसा होने पर नाभि (Nabhi) अपनी जगह से हट जाती है। इसके अधिकतर मामलों में नाभि ऊपर या नीचे (Nabhi Khisakna) की तरफ चली जाती है। नाभि (Nabhi) अक्सर किसी भारी वजन को उठाने, अचानक झुकने और यौन गतिविधियों (Sexual activities) को करने से नाभि खिसक (Nabhi Khisakna) जाती है।

नाभि खिसकने (Nabhi Khisakna) से कई परेशानियाँ हो सकती हैं जैसे पेट में तेज दर्द (Severe abdominal pain), कब्ज (constipation), उल्टी और जी मिचलाना (vomiting and nausea)। इसके अलावा नाभि खिसकने (Nabhi Khisakna) से महिलाओं में माहवारी (Menstruation in women)|

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नाभि खिसकने के लक्षण (Nabhi khisakne ke lakshan)

नाभि (Nabhi) अपनी जगह से हटने पर किसी भी दिशा की ओर जा सकती है। नाभि खिसकने (Nabhi Khisakna) के लक्षण उसके खिसकने की दिशा के हिसाब से इस प्रकार होते हैं –

  • नाभि (Nabhi) के ऊपर की ओर खिसकने पर घबराहट (Nervousness), उल्टी (Vomiting), कब्ज (Constipation), जी मिचलाना (nausea) शुरू हो जाता है
  • नाभि (Nabhi) के नीचे की ओर खिसकने से दस्त (Diarrhea), स्वप्न दोष (Dream Defects) और पाचनतंत्र में गड़बड़ी (Digestive System Disturbances) होती है।
  • नाभि (Nabhi) आगे-पीछे खिसकने से पेट में दर्द होना शुरू हो जाता है।
  • महिलाओं में नाभि खिसकने (Nabhi Khisakna) से कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं, जिसमें गर्भाशय से सम्बंधित परेशानी (Uterine Problems) और मासिक धर्म का अनियमित होना (Irregular menstruation) शामिल है। इसमें पेट के निचले हिस्से (Lower abdomen) से पीठ के निचले हिस्से (Lower back) और जांघों में दर्द (Thigh Pain) होता है।
  • नाभि (Nabhi) का बाएं कुल्हे की तरफ खिसकने से शरीर के दाएं भाग में समस्याएं उत्पन्न होती है।
  • बाई तरफ नाभि खिसकने (Nabhi Khisakna) से किडनी में कठोरता और आंतों में दर्द होने लगता है।

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नाभि खिसकने के कारण (Nabhi Khisakna ke Karan)

नाभि खिसकने (Nabhi Khisakna) के बहुत से कारण होते हैं-

  1. पेट की मांसपेशियों का मजबूत न होना (Absence of Abdominal Muscles)
  2. शारीरिक गतिविधियां नहीं करना (Not doing physical activities)
  3. एक्सीडेंट होने के कारण पेट में झटका लगना (Jerk in the stomach due to accident)
  4. किसी कारण से पेट के आसपास तुरंत झटका लगना (Instant jerking around belly for some reason)
  5. कई बार चलते-चलते गिर जाना या फिर पैर मुड़ जाना (Falling or twisting feet)
  6. पेट में गैस होने के कारण (Due to stomach gas)

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नाभि खिसकने का उपचार (Nabhi khisakne ka upchar)

  • एक चम्मच सौंफ (Anise) और एक चम्मच मिश्री (Sugar candy) बराबर मात्रा में तीन टाईम खाए
  • पेट की मांसपेशियां मजबूत करने (Strengthen abdominal muscles) के लिए एक चम्मच धनिया (coriander) एक चम्मच सौंफ (Anise) एक चम्मच जीरा (cumin) तीनों को भून ले और बराबर इतनी ही मात्रा में मिश्री (Sugar candy) मिलाकर पाउडर बना लें रोज खाने के बाद 3 टाइम्स एक चम्मच खाएं
  • अदरक का रस (Ginger juice) नाभि (Nabhi) के अंदर डालें और रुई लगा दे और लेट जाए 10 मिनट वैसे ही लेटे रहे सरसों का तेल (mustard oil), गाय का घी (cow ghee), भी यूज कर सकते हैं
  • नियमित योग करें (Do regular yoga)
  • खानपान में सुधार करें (Improve catering)

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नाभि खिसकने पर इस योग का करें अभ्यास:- रबड़ का बॉल ले , नाभि में बोल रखें और पेट के बल उल्टे होकर सो जाएं और बॉल नाभि की पोजीशन में होना ऐसी पोजीशन जैसे नीचे लेडीज आसन कर रहे है अगर बॉल का दबाव नहीं है तो आगे पीछे करे प्रेशर हलका दे ताकि नसे अपनी postion पर आ जाए तुरंत नाभि सेट हो जाती है|

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