Shmashaan Ghaat Ki Kahani | श्मशान घाट की कहानी | Horror Story In Hindi

हम सबने आज तक कई बार कुछ ऐसी प्लेस के बारे में सुना है समझा है, जिसके बारे में लोग कहते हैं की नाईट में वहां मत जाना क्यूंकि नाईट में वहां Bhoot रहते हैं। मुझे यकीन है की आप सबने ऐसी किसी न किसी प्लेस के बारे में अपनी लाइफ में जरुर सुना होगा। ऐसे ही स्टोरी और मान्यताओं से भरा हुआ है यह देश। आप किसी भी सिटी की किसी भी स्ट्रीट में चले जाईये आपको Bhooto से सम्बंधित (Shmashaan Ghaat Ki Kahani) एक डर की स्टोरी जरूर मिलेगी।

यानी कि हम ऐसी प्लेस की बात कर रहे हैं जिसके बारे में कई लोगों ने कई स्टोरीस बनाई हैं। एक ऐसे ही जगह के बारे में हम आज बात करेंगे।

Shmashaan Ghaat Ki Kahani, मुझे यकीन है की आप सबने इस शब्द को सुना होगा मुझे यकीन है कि आप सब यह जानते होंगे कि Shmashaan Ghaat होता क्या है। अगर हम हमारी Hindu Culture की बात करें तो Shmashaan Ghaat एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं हमारी पूरी कल्चर में।

कहते हैं की एक इंसान के पूरे लाइफ का जो सफर होता है। वह इसी Shmashaan Ghaat पर जाकर खत्म होता है जहां से उसे मुक्ति प्राप्त होती है। जहां से वह अपने लाइफ का सारा एक्टिविटी छोड़कर परमात्मा (Divine) को जा मिलता है। एक सिद्धांत तो यह भी है जो यह बताती है कि भाई यह शमशान घाट (Shmashaan Ghaat) जो है कितना महत्वपूर्ण है, कितना पाक है कितना साफ है!!

लेकिन! श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) का एक और भी Side और वह Side है, उसका Horror side आप सबने यानि की हम सब ने अक्सर कई स्टोरीज़ सुनी होंगी। Kabristan के बारे में, श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) के बारे में, Burial Ground के बारे में अलग-अलग धर्म (Dharm), अलग-अलग मान्यताएं और अलग-अलग स्टोरीज़।

श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) में नाईट को नहीं जाते। Kabristan से होकर नाईट को नहीं गुजरते। मैं सोचता हूं कि ऐसा क्यों है, तो बात करते हैं आज के हमारे उस श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) के बारे में जो कि शायद पहाड़ों के बीच में Forests के बीच में नदियों के किनारे खो गया है।

Uttarakhand एक ऐसा राज्य जो अपनी बेहद ब्यूटीफुल पहाड़ियां बेहद ब्यूटीफुल जंगल और इन सारी चीजों की वजह से जाना जाता है। Uttarakhand में एक छोटा सा टाउन है, जिसका नाम है Baijaro। Baijaro एक बहुत ही छोटा सा टाउन है बल्कि मैं कहूंगा मेरे ख्याल से वहां पर शायद 250-400 घर होंगे और सिर्फ एक रोड है जो आपको एक जगह से दूसरी जगह पर Connect करती है और बीच में आता है यह छोटा सा टाउन बैजरो!

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मैंने अपना सफर शुरू किया Baijaro। मैं Driv करके जब Baijaro पहुंचा तब लगभग करीब इवनिंग हो चुकी थी और इवनिंग के करीब आसपास 5 या 5:30 बजे होंगे। मैंने वहां पर एक Hotel ढूंढने की कोशिश की, लेकिन वह मुझे वहां मिला नहीं। तभी मेरी वहां पर एक Local Village वाले से बातचीत हुई और मुझे अपने घर में जगह दी। नाईट में खाना खिलाया। हमने काफी बातें की और मैंने उनसे पूछा। इस श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) के बारे में।

जो मुझे खबर मिली थी वह यह थी की Baijaro के पास ही एक विलेज है जिसका नाम है Tandola। Tandola में यह शमशान घाट (Shmashaan Ghaat) है जो कि अब एक Biaban है, उजाड़ हो चुका है और अक्सर यहां से नाईट में Hauntings की खबरें आ रही हैं। आस-पास के विलेज वालों में इस श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat को लेकर एक अजीब सा डर है। ऐसा माहौल बना चुका था। यह शमशान घाट (Shmashaan Ghaat अब लोग रात में उस रास्ते से जाने से कतरा ने लगे थे। जरूरत चाहे कैसी भी हो, कोई Medical जरुरत हो या कुछ भी लोग अब वह रास्ता चुनने से डर रहे थें।

जब मुझे यह News मिली तो मैंने सोचा यार एक बार चल कर देखा जाए, पता किया जाए, वहां पर है क्या, शायद मेरे वहां जाने से कोई एक सच्चाई बाहर आ सके और शायद वह सच्चाई इन विलेज वालों की मददगार हो सके।

जब मैनें उस विलेज वाले से यह पूछा कि भाई यह शमशान घाट (Shmashaan Ghaat) है कहाँ तो उन्होंने मुझे बताया कि Baijaro से आपको Track शुरू करना पड़ेगा Tandola की तरह यह करीब 8 से 8.5 किलोमीटर का एक Track होगा, जोकि एक काफी मुश्किल ट्रेक है लेकिन आप चार-पांच घंटे में वहां पहुंच जाएंगे।

जब आप Tandola जाएंगे तो तंदोला और Baijaro की बीच में यानी की Baijaro से करीब 4 किलोमीटर आगे Tandola की तरफ रास्ते में श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) मिलेगा। मैने उनसे और ज्यादा जानने की कोशिश की पर उन्होंने मुझे कुछ खास बताया नहीं। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा की आप Tandola के विलेज वालों से बात कीजिए क्योंकि उनकी मान्यता के हिसाब से यह जगह Haunted और जो स्टोरीस वो लोग हमें बताते हैं हम उन पर यकीन करते हैं ।

मैंने सफ़र शुरू किया Tandola के लिए ये ट्रेक वाकई Hard trek था, एक सीधी खड़ी चढ़ाई थी लेकिन Thank god की रास्ता थोडा ठीक था। पगडंडियाँ थी जहाँ पर प्लेन मिट्टी थी अक्सर क्या होता है की जब आप पहाड़ों पर पत्थरों पर Trek करते हैं तो वो ज्यादा मुस्किल होता है।

मैं उसी रास्ते से होता हुआ जा रहा था। पहले मैंने यह सोचा था कि मैं दिन में एक बार श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) रुक कर के वहाँ देखूंगा की वहां दिन में माहौल कैसा है। या फिर मैं श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) जाऊंगा और अपनी Investigation करके वापस आ जाऊंगा। लेकिन मैंने यह सोचा कि क्यों न पहले मैं Tandola जाऊं। वहां के लोकल विलेज वालों से बात करूं। पता तो चले कि बात है क्या?

मैं सीधे Tandola पहुँच गया करीब 3- 4 घंटे का एक मुश्किल ट्रेक करने के बाद मैं वहां पहुँचा तो मैं बहुत थक गया था। मैं वहां दिन के 1:30 बजे के आसपास वहां पहुंचा था । मैं वहां गया और मैंने वहां बातचीत करनी शुरू की। मैने उन्हें बताया कि मैं कौन हूं और मैं क्या करता हूं और मैं किस मकसद से यहां पर आया।

2:30 रहे थे दिन के। विलेज में चौपाल लगी और उस चौपाल में मुझे एक अच्छा सा दोपहर का भोजन कराया गया। इस दौरान वहां पर मेरी बहुत सारे लोगों से बातचीत हुई, तब लोगों ने मुझे बताया कि जो श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) है असल में जानवरों का श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) था,

जी हाँ जानवरों का श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) !! मेरे लिए ये एक बहुत ही अलग कहानी बन चुकी थी अब। अब मेरे लिए यह बिल्कुल नए तरीके का जाँच पड़ताल बन चुका था।

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लोगों ने भूत प्रेत चुड़ैल आत्मा, वगैरा-वगैरा, इनकी स्टोरीज़ मैंने सुनी है, लिखी है, लेकिन एक ऐसा श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) जो जानवरों को श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) हुआ करता था। यह मेरे लिए थोड़ा सा नया और Strange भी था। एक ऐसा श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) जो कभी किसी ज़माने में जानवरों का श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) हुआ करता था और आज वो Haunted है। कुछ जानवरों की आत्माओं (Animal spirits) से।

मुझे ज्यादा बातचीत करने पर पता चला कि ज्यादातर वहां पर कुछ घोड़ों की आवाजें (Sounds of Horses) आती है। हालाँकि हमें कुछ लोगों ने ये भी बताया की वहां कुछ कुत्तों की आवाजे (Dog voices) भी हैं ।

जब मैं ज्यादा जानें की कोशिश की तो मुझे ये कहानी से ये समझ आया की अगर ये श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) यहाँ पर था तो इसे बंद क्यों कर दिया गया? सबसे पहले तो यह सवाल आता है और यह शमशान घाट (Shmashaan Ghaat) चालू किसने किया था?

गावं वाले ये तो नहीं बता पाए कि ये शमशान घाट (Shmashaan Ghaat) शुरू किसने किया था? लेकिन हाँ उन्होंने मुझे ये जरुर बताया की इसे बंद क्यूँ किया गया।

विलेज में एक आदमी हुआ करता था जिसके पास एक जोड़े घोड़े (Hourses) थे, एक नर और एक मादा।

एक नाईट इन दोनों नर और मादा घोड़ों के ऊपर शायद कोई Defect हुआ या कुछ और हुआ या फिर कुछ भी हुआ, इस बात का जवाब तो विलेज वाली भी नहीं दे पाए कि हुआ क्या था।

उसके बाद उसके बाद ये घोड़े अपना घुड़साल छोड़कर जंगल में चलेंगे। अगले दिन सुबह जब मालिक की नींद खुली तो उसने देखा की घुड़साल में घोड़े नहीं है, तो उसने एक बड़े Level पर तलाशी अभियान शुरू किया और गांव वालों ने मिलकर Forest के आसपास इन दोनों घोड़ों को खोजने की कोशिश की। लेकिन वो दोनों घोड़े नहीं मिले।

इस बात को करीब तीन-चार दिन गुजर गए। तभी अचानक उनमें से एक घोड़ा (Horse) अपने आप वापस आता है। लोग उसका स्वागत करते हैं। दूसरा घोड़ा (Horse) अभी भी नहीं मिला है। लेकिन मालिक को इस बात की राहत थी कि कम से कम एक घोड़ा (Horse) जो है, वह मेरा वापस आ गया। जैसे ही वह, घोड़ा (Horse) गांव में वापस कदम रखता है। उसके तुरंत बाद कुछ दिनों के अंदर ही विलेज में जानवर मरने लगें।

विलेज वालों का ये मानना था कि यह घोडा (Horse) शापित हो गया है। इसके अंदर एक शैतानी आत्मा (dark spirit) गई है जिसकी वजह से ही बाकी जानवरों को भी मार रहा है। इस बात से विलेज वालों ने मिलकर उस घोड़े (Horse) को भी मारने का फैसला किया और यही हुआ। उसके बाद इन सारे जानवरों की लाशों को ले जाकर के उसी श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) पर जला दिया गया। उनका अंतिम संस्कार (Funeral) कर दिया और उसके बाद इस श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) को हमेशा हमेशा के लिए बंद कर दिया क्या?

धीरे-धीरे जब लोग Tandola से निकलकर Badro जाने लगे। जब लोग यह सफर पूरा करने लेगे, तो रात में अक्सर उन्हें रोने की आवाज सुनाई देने लगी। कई लोगों ने रात के करीब 2:00 बजे के आसपास घोड़े (Horse) को सामने से देखने की बात कही कि मैंने देखा है की यह वही घोडा (Horse) था जिसे गांव वालों ने मार डाला था।

यह स्टोरी अपने आप में थोड़ी अलग थी और मुझे बेचैन कर रही थी। यह सब जब मुझे पता चला तो मैं तो यह नहीं सोच पा रहा था की मैं वहां जाऊं या ना जाऊं। लेकिन फिर भी मैंने यह फैसला किया कि मैं आज नाईट वहां रुकुंगा और देखूंगा कि क्या होता है? इस पूरी स्टोरी के साथ मेरा दोपहर का भोजन खत्म हुआ और करीब 3:15 या 3:30 बज रहे थे। जब मैंने गांव वालों से विदा ली और वापस अपना सफर शुरू किया उस श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) के तरफ।

मिट्टी वाला रास्ता थोड़ा फिसलन भरा था। इस कारण पहाड़ों से इवनिंग के वक्त नीचे उतरते हुए पैर जमा जमा कर चलना था और ऐसी परिस्थिति में स्पीड कम हो गयी थी और इसी कम स्पीड के साथ मैं करीब सवा छह या 6:30 बजे उस श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) पहुंचा। इवनिंग ढल चुकी थी, अंधेरा लगभग हो ही चुका था। जरा जरा सी लालिमा अभी भी बाकि थी आसमान में लेकिन दिखने को कुछ दिख नहीं रहा था।

और जब मैं वहां पहुंचा तो मैंने देखा कि मेरे सामने एक टुटा हुआ संरचना है, एक छोटी सी इमारत जिसमें सिर्फ तीन दीवारें थी एक तरफ से वह खुला हुआ था, ऊपर Cement की छत थी। पहले मुझे यह समझ में नहीं आया कि क्या वाकई यह वही श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) है, लेकिन तब मैंने वहां पर Flashlight से देखा तो वहां पर लिखा हुआ था शान यानि की शमशान घाट (Shmashaan Ghaat) का शम और घाट हट चका था और सिर्फ का शान लिखा हुआ था।

यह पूरी बिल्डिंग अब कुछ इस तरीके की हालत में थी जैसे मनो की अब बस गिरने वाली ही हो। इसकी ठीक नीचे एक पहाड़ी नदी बह रही थी। इस श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) से पहाड़ी नदी तक का जो रास्ता था, निचे उतरने वाला ये करीब 30 मीटर का रहा होगा। जब मैंने मेन रास्ता छोड़ कर श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) की उस इमारत के पास पहुंचा और वहां से मैंने धीरे-धीरे अपना सफ़र शुरू किया उस नदी के लिए।

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रास्ते में घनी झाड़ियाँ घास ये सब थे। और मैं बार-बार उनके ऊपर पैर रख कर जा रहा था। कुछ आवाज भी ऐसी आ रही है जिसके बारे में थोडा अनिश्चित था, हाँ ये हौन्टिंग से रिलेटेड कोई आवाज नहीं थी, ऐसा होता है झाडियो में और झाडियां भी थोड़ी गीली थी। जब आप किसी सुनसान जगह पर चलते हो तो आपको अक्सर ये लगता है की आपके पीछे कोई है और आप बार बार मुड कर पीछे देखते हो। बस कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी हो रहा था और मैं बार बार पीछे मुड कर देख रहा था लेकिन वहां कोई नहीं होता था।

ये पार करते हुआ मैं नदी के पास पहुंचा। नदी की जो धारा थी एक नार्मल स्पीड में थी जैसे की एक पहाड़ी नदी होती है।

पहाड़ी नदी में बहुत सारे बड़े-बड़े पत्थर थे और पानी जो था वो उन पत्थरों के ऊपर गिरता हुआ नीचे की ओर जा रहा था, यानि उस जगह पर इस नदी की आवाज जो थी वो बहुत तेज थी, अगर आप ऊपर के रस्ते से भी गुजर रहे हैं…तो उस नदी की आवाज साफ-साफ आपके कानों पर जाएगी और जैसे-जैसे रात ढल रही थी, वैसे-वैसे वह आवाज बढ़ती जा रही थी। क्योंकि रात में पानी का जो बहाव होता है, वह थोडा तेज हो जाता है। और आस पास सन्नाटा होने के कारण भी आवाज ज्यादा सुनाई देता है।

मैंने देखा की आस पास क्या-क्या है क्योंकि जब भी आप इन्वेस्टीगेशन के लिए किसी जगह पर जाते हैं तो यह समझना जरूरी है कि उसके आस-पास क्या है, कैसी बिल्डिंग..कैसे लोग हैं..कैसे पेड़ पौधे हैं, कैसा पानी है, आवाज कहां से आती है वगैरा-वगैरा आपको उसे जानना बहुत जरूरी होता है। क्यूंकि रात में जब आप इन्वेस्टिगेट कर रहे होंगे तो आपको ही पता होना चाहिए कि आपके कानो तक पहुंचने वाली हर एक आवाज किस चीज़ की आ रही है?

रात के करीब 9:30 बजे के आसपास श्मशान घाट के पास जो छोटा सा टुटा हुआ स्ट्रक्चर था उसके अंदर गया। मैंने आपना बैग रखा और तभी अचानक से वहां पर हल्की हल्की बारिश, शुरु हो गयी, धीरे-धीरे बारिश बड़ती गयी और मैं वहां बैठा यह प्रे कर रहा था की ये बारिश कब रुकेगी। क्योंकि मुझे वहां पर दो चीजों का डर था एक जैसे- जैसे बारिश तेज होती जाएगी…मेरे भीगने के चांसेस बढ़ जाएंगे क्योंकि मेरे पास कुछ है नहीं, मैं खैर और कुछ नहीं कर सकता था।

और एक बात का डर था कि कहीं मेरे ऊपर ये टुटा हुआ स्ट्रक्चर न गिर जाये। बार-बार मन में प्रे कर रहा था कि बारिश बंद हो जायेया या कम से कम धीरे-धीरे हो। करीब 10:30 बजे के आसपास बारिश बंद हो गई और आप यकीन नहीं करेंगे। बिल्कुल अचानक से बंद हो गया?

आमूमन बारिश तो धीरे बंद होती है। धीरे धीरे पहले हलकी फिर और हलकी और धीरे धीरे उसकी बुँदे पतली होती जाती है, छोटी होती है फिर बहुत छोटी होती है और फिर गायब हो जाती लेकिन यहाँ ऐसा नही हुआ एक बार में ही अचानक बारिश।

बारिश के कारन जमीन पूरी गीली हो चुकी थी। जगह-जगह पानी जमा चुका था। उस जमीन के ऊपर मैं धीरे-धीरे पैर जमा जमा कर चल कर आसपास देखने की कोशिश कर रहा था। करीब आधा घंटे तक श्मशान का मुआयना किया.. लेकिन वहां मुझे कुछ नहीं मिला वहां एक अजीब सी शांति थी। मेरे सारे डिवाइस की रीडिंग बिलकुल नार्मल आ रही थी। श्मशान के पीछे जो नदी बह रही थी उसकी आवाज और ज्यादा तेज हो चुकी थी। मैं क्लियरली सुन पा रहा था कि बारिश की वजह से जो पानी तेज हुआ है और पानी अपनी पूरी ताकत के साथ जब पत्थर से टकरा था उसकी आवाज बहुत तेज आ रही थी।

वहीँ श्मशान घाट के दूसरी तरफ एक जंगल था। जंगल से मुझे हाथियों के चिहादने की आवाज मेरे कानों तक पहुंच रही थी। मुझे लग रहा था हाथी मेरे तरफ ही यानि श्मशान के तरफ आ रहे है। मुझे समझ नही आ रहा थी की वे यहाँ आ गये तो मैं क्या करूँगा मैं बहुत बडे मुश्किल में था और मुझे नहीं पता था की मुझे क्या करना है। जमीन पूरी गीली हो चुकी थी। ऐसी सिचुएशन में भाग भी नहीं सकता था, आपकी छोटी गलती आपको हजारो फीट निचे गहरे खाई में ले जाती और किसी को पता भी नहीं चलेगा।

यह सोच सोच, थोड़ा, समय और गुजरा और एकदम से सब कुछ शांत हो गया। आपकी विश्वाश नहीं करेंगे। एकदम से सब कुछ शांत हो गया, जो भी आवाजें आ रही थी सब आनी बंद हो गई। पक्षियों की आवाज आनी बंद हो गई। आसपास मेरी कोई आवाज नहीं हो रही थी। यह सब कुछ अचानक से हुआ। यह थोडा स्ट्रेंज था। जैसे ही यह आवाज बंद हुई। मैंने तुरंत अपने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड के आसपास की रीडिंग्स उठाने की कोशिश की लेकिन कुछ नहीं मिला। टेंपरेचर लेवल भी लेने की कोशिश की लेकिन सब एक दम नार्मल, नाईट विज़न कैमरा के पास गया उनको इंस्टाल किया। जंगल की तरफ उससे देखन शुरू किया। लेकिन वहां भी कुछ नहीं था।

यह शांति वैसी नही थी जो आपके मन को सुकून देती है। यह शांति वैसी थी जैसा सन्नाटा होता है न जो आपके मन का सारा सुकून ले लेता है। आपका दिमाग हजारों किलोमीटर प्रति घंटे के हिसाब से भागने लगता है और यह सोचने लगता है। कैसे इस जगह से इस सन्नाटे से दूर जाया जाए। यह शांति अब सन्नाटा बन चुकी थी। पूरी तरह से शायद कहीं ना कहीं मेरे दिमाग पर भी ये सन्नाटा हावी हो रही थी। मेरे दिमाग में यही चल रहा था की पूरी रात यहाँ रुकूं और सच जानने की कोशिश करना चाहिए या मुझे यहां से निकल जाना चाहिए। इस पूरे पसोपेश में पूरी कन्फ्यूजन के दौरान अचानक से मुझ आती हैं कुछ आवाजें।

घोडा (Horse), जी हाँ घोडा (Horse)। जिस सड़क से मैं निचे उतरा था इस श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) के स्ट्रक्चर तक आने के लिए उससे और उस Road के बीच की डिस्टेंस करीब 4-50 फीट थी और मुझ तक आइ कुछ घोड़ों के चलने की आवाजे! और वह आवाज धीरे धीरे मेरे पास आ रही थी। इन आवाजों ने मुझे बिलकुल स्थिर कर दिया था और मैं एक ही जगह पत्थर जैसे खड़ा था।

आपने कभी 3d गाना सुनना है। इसमें आवाज आपके कानों के साथ खेलती है। कभी लेफ्ट जाती है, कभी राइट जाती है। यहाँ एक्साक्ट यही हो रहा था बस फर्क इतना था यह सब कुछ इन घोड़े (Horses) की आवाज के साथ हो रहा था। मुझे लगता था कि घोड़ा (Horse) मेरे लिफ्ट में चल रहा है और कभी मुझे लगता है कि घोड़ा (Horse) मेरे Right में चल रहा है और तब आती है। हिन्हिना ने की आवाज यानि की घोड़े की बोलने की आवाज। एक जोर की आवाज आती है और पता नही क्यू मैं इस आवाज के साथ Action में आ जाता हूँ और एकदम से मेरा ध्यान टूटा और मुझे लगा कि आवाज मेरे ऊपर से आ रही है यानी कि उस रास्ते से आ रही है। मैं तुरंत उस तरफ दौड़ता हूं।

यह सब कुछ सोचता हुआ। अब मैं तो दौड़ता जा रहा था और मेरे दिमाग में चल रही थी मन ही मन हे भगवान वहां घोड़ा (Horse) होना चाहिए। वहां असली घोड़ा होना चाहिए। यह सब कुछ सोचता सोचता में दौड़ता हुआ उस मेन रस्ते पर पहुंचता 10 मीटर दौड़ के आगे जाने की कोशिश की। लेकिन वहां पर कोई घोड़ा (Horse) नहीं, घोड़ा तो छोड़िए वहां कोई जानवर भी नहीं और अब आवाज भी बंद हो चुकी थी।

हां, शायद आप ये कह सकते हैं कि जब तक मैं वहां पहुंचा तब तक हूं घोड़ा (Horse) वाहाँ से जा चुका होगा। लेकिन जरा सोचिए 40 फीट दौड़ने में कितना समय लग जाएगा आपको? और उतने ही देर में घोड़े (Horses) जैसा बड़ा जानवर कहां चला जाएगा?

मैंने घोड़े (Horses) को वहाँ आस-पास चारों तरफ देखने की कोशिश की। चारों तरफ लेकिन मुझे कुछ नहीं दिखा मैं भाग कर वापस श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) की तरफ गया। अंदर गया। मैं अपना बैग निकालकर कुछ और टॉर्च निकालने जा रहा था। लेकिन तभी सब कुछ दोबारा शुरू हो गया। सारी आवाज वापस आना शुरू हो गयी. ऐसा लगा मानो जैसे किसी ने उस नदी उस हाथी उन हवाओं उस जंगल को पॉज कर दिया था। नदी वापस बहनी शुरू हो गई उसी रफ़्तार में। नदी की वही आवाज दोबारा आने लगी। हाथी दोबारा बोलने लगी। हवाएं दुबारा चलने लगे और इस चीज़ ने मुझे शॉक कर दिया मैं सोच चूका था कि आज चाहे जो कुछ भी हो, मैं पूरी रात यही रहने वाला हूं। जो होगा देखा जाएगा और मैं वहां ही रुक गया। पर अफशोश की उस समय के बाद उस जगह पर दोबारा कुछ नहीं हुआ।

सुबह के 5:30 बजे के आसपास पहली लाइट मुझ तक पहुंची। मैंने उस श्मशान घाट (Shmashaan Ghaat) को देखा, उस नदी को देखा और मन में खुद से बस एक ही बात कही। जीवन में कई बार कुछ ऐसी चीजें हो जाती है जिसका शायद आप कभी Expansion नहीं दे सकते। जीसकी वजहें आप कभी नहीं बता पाएंगे और इसी सोच के साथ मैं उस जगह से वापस Badro की ओर निकल गया।

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