Friday, July 1, 2022
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काली हल्दी क्या हैं? What is Black Turmeric?

काली हल्दी (Black turmeric) को बहुत ही ज्यादा फायेदमंद माना जाता है। इसमें बहुत शाक्ति होती है। ये हल्दी बहुत ही कम मात्रा में पाई जाती है और कही कही ही लोगों को देखी जाती है। काली हल्दी (Black turmeric)का रंग अंदर से हल्के रंग की होती है। इसका पौधा केली के समान होता है। तंत्र शास्त्र में काली हल्दी (Black turmeric) का प्रयोग वशीकरण, धन प्राप्त हेतु और अन्य तांत्रिक कार्य के लिए किया जाता है। काली हल्दी में किसी चीज को वस में करने की विशेष क्षमता होती है।

आदिवासी समुदायों के द्वारा इसका उपयोग निमोनिया, खांसी और ठंड के उपचार के लिए भी किया जाता है। बच्चों और बूढ़े मे ये बुखार और अस्थमा के लिए इसका उपयोग किया जाता है। इसके द्वारा बनाया गया राइजोम का पाउडर फेस पैक के रूप में इस्तमाल किया जाता है। इसके ताजे पेस्ट को माथे पर लगाते है, जो माइग्रेन से राहते के लिए या मस्तिष्क और घावों पर शरीर के लिए किया जाता है। कीड़े मकोड़े काटने पर इस पर राइजोम का पेस्ट लगाया जाता है। ल्यूकोडार्मा, कैंसर, और एच आई वी एड्स जैसी बीमारी के रोकने में भी यह उपयोग किया जाता है।

काली हल्दी (Black turmeric) में इनुप्रोकेन पाया जाता है, जिससे जोड़ों का दर्द से राहत मिलती है। और इसमें इन्फेलेंमेंटरी गुण होते है जिससे त्वचा की खुजली ठीक होती है। अगर आपके त्वचा में चकत्ते होते हैं तो काली हल्दी वाले दूध में रूई भिगोकर 15 मिनट तक त्वचा में लगाने पर चकत्ते कम होते है और साथ ही त्वचा पर चमक और चहरे पर निखार भी आता हैं। इस हल्दी को चमत्कारी माना जाता है, इसमें तांत्रिक और मांत्रिक के उपयोग से बीमार व्यक्ति को स्वस्थ किया जाता है। काली हल्दी का चूर्ण दूध में भिगोकर चेहरे और शरीर पर लेप लगाने से सुंदरता भी बढ़ता है।

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काली हल्दी के फायदे

1 . काली हल्दी (Black turmeric) के कुछ दाने बनाएं। उन दाने को धागे में लपेटकर धूप दिखाकर पहन लें। जिस भी लोग को जादू टोना से परशानी होती हैं वो इस तरह की माला पहन कर, ग्रहों के दुष्प्रभावों, टोने- टोटके व नजर के प्रभाव से बच सकते है।

2. यदि आप किसी भी जरूरी और नए काम में जा रहे हैं, तो काली हल्दी का टीका लगाकर जाने से उस कार्य में सफलता मिलने के योग और अधिक बढ़ जाते हैं।

3. यदि आपके घर में कोई बीमार पड़ते है, तो गुरुवार को आप आटे के पेड़े बनाकर उसमें गीली चने की दाल के साथ गुड़ और थोड़ी सी पिसी काली हल्दी को दबाकर रोगी व्यक्ति के ऊपर से 7 बार उतार कर गाय को खिला दें तो इससे आपको लाभ मिलेगा और बीमार लोग ठीक हो सकते है।

4. यदि आपके जेब में पैसा नहीं टिकते है तो शुक्ल पक्ष के पहली शुक्रवार को चांदी की डिब्बी में काली हल्दी, नागकेसर व सिंदूर को साथ में रखकर देवी लक्ष्मी की तस्वीर के सामने रख दें। कुछ देर बाद इस डिब्बी को अपने लॉकर या जहां आप पैसे रखते हैं वहां रख दें। इससे बरकत बनी रहेगी।

5. यदि किसी व्यक्ति या बच्चे को बुरी नजर लग गई है, तो आप काले कपड़े में काली हल्दी की गठान बांधकर 7 बार उसके ऊपर से उतार कर जल में बहा दे तो उससे जल्दी ही नजर उतर जाएगी।

6. यदि आपको अपने काम में किसी भी तरह की नुकसान का सामना करना पर रहा है तो आप पीले कपड़े में काली हल्दी, गोमती चक्र, चांदी का सिक्का और कौड़ियां बांधकर 108 बार ऊं नमो भगवते वासुदेव नमः का जाप करके धन रखने के स्थान पर रख दे जिससे आपके बिजनेस में सफलता मिलने लगेगी।

काली हल्दी खाने के फायदे

जो कुछ भी हम इस धरती पे देखते हैं उनके कुछ न कुछ फायदे अव्यश होते हैं। इस ब्रह्माण्ड में कुछ एसा चीज नहीं है, जिसके थोड़ी बहुत फायदे और नुकसान न हो। उसी में काली हल्दी एक हैं, जिसे हम खाने में भी इस्तमाल करते हैं। तो आइए जानते है की काली हल्दी (Black turmeric) खाने के क्या फायदे है-

1 .लोगों को जोड़े में दर्द और जकड़न पैदा करने वाली बीमारी से काफ़ी तकलीफ होती है। यह रोग मनुष को मुख्यतः जोड़ों की हडियों के बीच रहने वाली आर्टिकुलर कार्टिलेज को नुकसान देता है। इससे बचाव के लिए काली हल्दी काफी उपयोगी होता हैं। इसमें इबुप्रोफेन नामक तथ्य पाया जाता है जिससे पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस का दर्द ठीक किया जा सकता है।

2. काली हल्दी का उपयोग अस्थमा, न्यूमोनिया जैसी बिमारियों में किया जाता है। अगर आप सुखी या गीली खांसी से परेशान हैं तो हल्दी इसके लिए बेहतर इलाज साबित हो सकता है। हल्दी की गांठ को धोकर उसके रस को पीने से जल्द ही खांसी दूर हो जाती हैं। फेफडों की सूजन को घटाता है व अस्थमा के रोगियों को आराम भी पहुँचता है।

3. हल्दी के चीज को खाने से आंतो में बैक्टीरिया मात्रा में पैदा होती हैं। एसिड इत्यादि से पेट की बल्क्हेड सुरक्षित रहती हैं तथा पेप्टिक अलसर की सम्भावनाये भी कम रह जाती हैं।

4. अगर कोई व्यक्ति अल्सर रोग से पीड़ित है तो वैसे रोगियों को मेगोनंसम हल्दी के उपयोग जरूर करना चाहिए। क्योंकि हल्दी में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जिससे पेट में एसिड नहीं बनने देता हैं और अल्सर जैसी गंभीर बीमारी नहीं होती हैं।

5. कुछ रोग अधिकांश खून की खराबी से उत्पन्न होते हैं। इसके बचाव के लिए स्वच्छ वातावरण में रहना चाहिए ! इसके साथ आप काली हल्दी का इस्तमाल कर सकते है। इसमें एंटी इन्फ्लैमटॉरी जैसी गुण पाए जाते हैं जिससे त्वचा की खुजली ठीक की जाती है। और आपके शरीर में दाग खुजली नही होती हैं।

काली हल्दी हमे कहां मिल सकती है?

काली हल्दी (Black turmeric) की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु का होना जरूरी होती है। और इसके तापमान 15 से 40 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। इसकी उपज दोमट, बुलई, मटियार, प्रकार की भूमि में की जाती है। वर्षा के पूर्व जून के प्रथम सप्ताह में 2-4 बार जुताई करके मिट्टी भुरभुरी बना लेते हैं तथा जल निकासी की अच्छी व्यवस्था करके खेत में 20 टन प्रति हेक्येटर की दर से गोबर की खाद मिला दें, जिससे की कली हल्दी की उपज अच्छी हों।

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